नाबालिग यौन उत्पीड़न पीड़िता की अश्लील तस्वीरें छिपाने में लापरवाही पर राजस्थान हाईकोर्ट सख्त, संबंधित क्लर्क से मांगा स्पष्टीकरण; बार काउंसिल को दिशानिर्देश बनाने का आदेश
Amir Ahmad
27 Oct 2026 12:59 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग यौन उत्पीड़न पीड़िता की अश्लील तस्वीरें पेपरलेस मॉड्यूल सिस्टम पर दिखाई देते रहने के मामले में गंभीर रुख अपनाया। कोर्ट ने यह कदम तब उठाया, जब पहले ही यौन अपराधों के मामलों में पीड़ितों की पहचान और निजता सुरक्षित रखने के लिए दिशानिर्देश जारी किए जा चुके थे।
जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि पीड़िता की तस्वीरों को छिपाने में विफलता कोर्ट के पूर्व निर्देशों का पालन न करने के समान है और इससे उसकी निजता का उल्लंघन हुआ है। कोर्ट ने संबंधित क्लर्क से तस्वीरों को छिपाने में हुई चूक पर स्पष्टीकरण मांगा। साथ ही, राजस्थान बार काउंसिल के सचिव और अध्यक्ष को राज्य में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों के लिए ऐसे दिशानिर्देश तैयार करने का निर्देश दिया, जिनसे अदालतों में याचिकाएं और आवेदन दाखिल करते समय आवश्यक सावधानी बरती जा सके।
दरअसल, 21 मई 2026 को पारित आदेश में हाईकोर्ट ने यौन अपराधों से जुड़े मामलों में अश्लील तस्वीरें या वीडियो प्रस्तुत किए जाने की स्थिति में रजिस्ट्री और ट्रायल कोर्ट द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया तय की थी। इसका उद्देश्य पीड़िता की पहचान और निजता की रक्षा करना तथा ऐसी सामग्री को अदालत में दाखिल दस्तावेजों के साथ खुले तौर पर संलग्न किए जाने से रोकना था।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि गृह विभाग और पुलिस महानिदेशक ने राजस्थान के सभी थाना प्रभारियों को पूर्व आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं। इस पर हाईकोर्ट ने एडिशनल एडवोकेट जनरल को संबंधित परिपत्र के साथ अनुपालन रिपोर्ट रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने रजिस्ट्रार (न्यायिक) को भी पूर्व निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने और मुख्य पीठ, जयपुर पीठ तथा राज्य की अधीनस्थ न्यायपालिका की रजिस्ट्रियों द्वारा जारी निर्देशों एवं परिपत्रों की जानकारी देने को कहा।
वकीलों के लिए दिशानिर्देश तैयार करने का निर्देश देते हुए हाईकोर्ट ने दोहराया कि अदालत की कार्यवाही में जिन तस्वीरों या वीडियो पर भरोसा करना आवश्यक हो, उन्हें सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत किया जाना चाहिए। संबंधित जज या न्यायिक अधिकारी आवश्यकता पड़ने पर दलीलों की सुनवाई के दौरान ही उस लिफाफे को खोल सकेंगे।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई वकील इन निर्देशों का उल्लंघन करते हुए ऐसी तस्वीरें या वीडियो खुले तौर पर दाखिल करता पाया जाता है, तो राजस्थान बार काउंसिल उसके खिलाफ व्यावसायिक कदाचार के लिए उचित कार्रवाई कर सकती है।

