बीमारी, गर्भावस्था और भारी बारिश के कारण शारीरिक परीक्षा छूटी तो एक मौका और: राजस्थान हाईकोर्ट ने दी राहत

Amir Ahmad

20 Aug 2026 11:54 AM IST

  • बीमारी, गर्भावस्था और भारी बारिश के कारण शारीरिक परीक्षा छूटी तो एक मौका और: राजस्थान हाईकोर्ट ने दी राहत

    राजस्थान हाईकोर्ट ने उपनिरीक्षक और प्लाटून कमांडर भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल नहीं हो पाने वाले अभ्यर्थियों को एक बार फिर परीक्षा देने का मौका दिया।

    अदालत ने बीमारी, शारीरिक चोट, गर्भावस्था और भारी बारिश जैसी वास्तविक और अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण परीक्षा से वंचित रहे अभ्यर्थियों के लिए सितंबर 2026 में दोबारा शारीरिक दक्षता परीक्षा कराने का निर्देश दिया।

    जस्टिस समीर जैन की पीठ ने स्पष्ट किया कि यह राहत केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को मिलेगी, जो निर्धारित तारीख पर वास्तविक और उचित कारणों से परीक्षा में उपस्थित नहीं हो सके। दोबारा परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को आयोजन से होने वाले खर्च के लिए 10 हजार रुपये जमा करने होंगे। हालांकि, वैध गरीबी रेखा से नीचे की श्रेणी के अभ्यर्थियों को इस राशि से छूट दी गई।

    अदालत उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया के पहले चरण में सफलता हासिल कर ली थी लेकिन वास्तविक और अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण निर्धारित तारीख पर शारीरिक दक्षता परीक्षा में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा सके थे। अभ्यर्थियों ने एक और अवसर देने की मांग की थी।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी बताया गया कि इन पदों पर भर्ती करीब नौ साल बाद हो रही है। ऐसे में जिन अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया के पहले चरण को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया था, उन्हें केवल ऐसी परिस्थितियों के कारण बाहर करना उचित नहीं होगा, जिन पर उनका कोई नियंत्रण नहीं था।

    राज्य सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर पर दोबारा परीक्षा कराने के लिए व्यापक व्यवस्थाएं करनी पड़ेंगी और भारी खर्च होगा। राज्य की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि सार्वजनिक परीक्षाओं में व्यक्तिगत मामलों को व्यापक जनहित पर हावी होने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ऐसा करने से चयन प्रक्रिया लगातार चलने वाली प्रक्रिया बन सकती है।

    हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए भर्ती में करीब नौ साल के अंतराल और इस तथ्य को महत्वपूर्ण माना कि भर्ती प्रक्रिया का तीसरा चरण अभी शुरू नहीं हुआ। ऐसे में किसी तीसरे पक्ष के अधिकार भी अंतिम रूप से तय नहीं हुए।

    अदालत ने यह भी माना कि याचिकाकर्ताओं पर जानबूझकर परीक्षा से अनुपस्थित रहने का कोई आरोप नहीं है। इसके अलावा, उन्हें शारीरिक दक्षता परीक्षा में जानबूझकर अनुपस्थित रहने से कोई लाभ मिलने वाला भी नहीं था।

    जस्टिस समीर जैन ने कहा,

    "न्याय के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संतुलित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।"

    अदालत ने माना कि अभ्यर्थियों की अनुपस्थिति वास्तविक और अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण हुई।

    हाईकोर्ट ने कहा कि यदि शारीरिक दक्षता परीक्षा दोबारा आयोजित करने का केवल एक अवसर दिया जाता है तो इससे किसी पक्ष को कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा। हालांकि, इससे आयोजन करने वाले प्राधिकरण पर अतिरिक्त प्रशासनिक और आर्थिक बोझ पड़ेगा। इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए अदालत ने दोबारा परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों पर 10 हजार रुपये का खर्च डालने का फैसला किया।

    अदालत ने निर्देश दिया कि शारीरिक दक्षता परीक्षा सितंबर 2026 के दूसरे सप्ताह में निर्धारित केंद्र पर दोबारा आयोजित की जाए। इस अवसर का लाभ केवल वे याचिकाकर्ता उठा सकेंगे, जो निर्धारित समय के भीतर संबंधित प्राधिकरण से संपर्क करेंगे।

    हाईकोर्ट ने यह भी साफ किया कि यह आदेश सामान्य रूप से सभी अभ्यर्थियों के लिए भर्ती प्रक्रिया दोबारा खोलने का आदेश नहीं है। यह राहत केवल उन विशेष मामलों तक सीमित है, जहां अभ्यर्थी वास्तविक और अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण निर्धारित शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल नहीं हो सके।

    अदालत ने कहा कि इस सीमित राहत से न्याय और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच संतुलन कायम किया जा सकता है।

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