राजस्थान हाईकोर्ट ने दिए आदेश: सेवा अधिकरण में रिकॉर्ड से छेड़छाड़ के आरोपों की होगी जांच

Amir Ahmad

23 Jun 2026 12:38 PM IST

  • राजस्थान हाईकोर्ट ने दिए आदेश: सेवा अधिकरण में रिकॉर्ड से छेड़छाड़ के आरोपों की होगी जांच

    राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण में रिकॉर्ड से कथित छेड़छाड़ के गंभीर आरोपों को लेकर जांच के आदेश दिए। अदालत ने कार्मिक विभाग के सचिव को मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

    जस्टिस रवि चिरानिया ने 17 अप्रैल को पारित आदेश में अधिकरण के रजिस्ट्रार की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण पर असंतोष जताते हुए कहा कि वह अपनी जिम्मेदारी एक लिपिक पर डालने का प्रयास कर रहे हैं।

    अदालत ने कहा,

    "यह न्यायालय पाता है कि यह स्पष्टीकरण अत्यंत अव्यावहारिक है और रिकॉर्ड के आधार पर प्रथम दृष्टया असत्य प्रतीत होता है। जिस लिपिक पर गलती का आरोप लगाया गया, उसका नाम भी शपथपत्र में नहीं बताया गया। इसलिए यह स्पष्टीकरण सही और संतोषजनक नहीं लगता।"

    मामले के अनुसार याचिकाकर्ता को वर्ष 2015-16 में व्याख्याता पद पर पदोन्नत किया गया और वह वर्ष 2025 तक इस पद पर कार्यरत रहे। लेकिन वर्ष 2025 में राज्य सरकार ने अचानक उनकी पदोन्नति रद्द कर दी।

    सरकारी आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण, जयपुर में याचिका दायर की। उनका आरोप है कि खुली अदालत में अधिकरण ने सरकारी आदेश पर रोक लगाते हुए नोटिस जारी किया, लेकिन बाद में उस आदेश की प्रमाणित प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई।

    याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि मामले की फाइल में स्थगन आदेश दर्ज करने के बजाय बाद की एक अलग तिथि का आदेश रिकॉर्ड में शामिल कर दिया गया, जबकि उस दिन मामला अधिकरण के समक्ष सूचीबद्ध ही नहीं था। उस आदेश में स्थगन देने से इनकार दिखाया गया।

    आरोपों की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने 6 मार्च को अधिकरण के रजिस्ट्रार को नोटिस जारी कर शपथपत्र के माध्यम से जवाब देने को कहा था।

    रजिस्ट्रार का जवाब देखने के बाद हाईकोर्ट ने कार्मिक विभाग के सचिव को मामले की जांच का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि जांच के दौरान रजिस्ट्रार द्वारा दायर शपथपत्र को भी विशेष रूप से ध्यान में रखा जाए।

    हाईकोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध ताजा स्थिति के अनुसार, मामले की अगली सुनवाई 1 जुलाई को निर्धारित है। उसी दिन अधिकरण के सदस्यों को पक्षकार बनाए जाने संबंधी एक आवेदन पर भी अदालत आदेश पारित कर सकती है।

    यह मामला न्यायिक और अर्ध-न्यायिक संस्थानों में रिकॉर्ड की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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