बिना बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कोई वकील के तौर पर प्रैक्टिस नहीं कर सकता, राजस्थान हाईकोर्ट ने फर्जी वकील पर लगाया 50 हजार का जुर्माना
Amir Ahmad
10 Sept 2026 12:31 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने बिना बार काउंसिल में पंजीकरण के खुद को वकील बताकर अदालतों में पेश होने वाले एक व्यक्ति की याचिका खारिज करते हुए उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। व्यक्ति पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 319(2) के तहत आरोप है। यह धारा प्रतिरूपण कर धोखाधड़ी करने से संबंधित है।
जस्टिस रवि चिरानिया ने कहा कि कोई भी व्यक्ति तब तक वकील के तौर पर प्रैक्टिस नहीं कर सकता या खुद को वकील नहीं बता सकता, जब तक वह एडवोकेट अधिनियम 961 के प्रावधानों के अनुसार संबंधित राज्य की बार काउंसिल में विधिवत रजिस्टर्ड न हो।
मामले में याचिकाकर्ता ने अपने खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने की मांग की थी। आरोप है कि उसने बिना किसी बार काउंसिल पंजीकरण के अलग-अलग मामलों में अदालतों के सामने खुद को वकील के रूप में पेश किया और कई दस्तावेज भी दाखिल किए।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सामने अपने आचरण का बचाव करने की कोशिश की। हालांकि कुछ समय बाद उसकी ओर से याचिका वापस लेने की मांग की गई जिसे कोर्ट ने स्वीकार करने से इनकार किया।
हाईकोर्ट ने आरोपों के साथ उस घटना का भी संज्ञान लिया, जब वह एक मुकदमे की सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट में खुद को वकील के तौर पर पेश कर रहा था। वहां मौजूद वकीलों ने उसे पकड़ने की कोशिश की तो वह अदालत परिसर की दीवार फांदकर भाग गया। इसके बाद उसके खिलाफ FIR दर्ज की गई।
कोर्ट ने कहा कि याचिका वापस लेने की मांग भी उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि करती है। पीठ ने मामले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए याचिका खारिज की।
साथ ही याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। उसे यह राशि एक महीने के भीतर राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट क्लर्क्स एसोसिएशन में जमा करने का निर्देश दिया गया।


