वकील ने मुवक्किल के लिए अंतरिम राहत मांगी तो CAT ने माना दुर्व्यवहार, राजस्थान हाईकोर्ट ने आदेश पर लगाई रोक
Amir Ahmad
5 Sept 2026 12:53 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT ) जयपुर के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसमें मुवक्किल की ओर से अंतरिम राहत मांगने वाली वकील के खिलाफ दुर्व्यवहार की टिप्पणी करते हुए उन पर 7,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने नवोदय विद्यालय समिति के खिलाफ दायर वकील की याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और चुनौती दिए गए आदेश के संचालन पर रोक लगाई।
मामला एक ऐसे कर्मचारी के स्थानांतरण से जुड़ा है, जो नवोदय विद्यालय समिति में इलेक्ट्रीशियन-कम-प्लंबर के पद पर कार्यरत था। उसने अपने स्थानांतरण आदेश को चुनौती देते हुए CAT का दरवाजा खटखटाया। उसकी ओर से करीब 20 वर्षों से वकालत कर रहीं एडवोकेट पैरवी कर रही थीं।
CAT ने मामले में प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया। इसी दौरान अधिवक्ता ने अपने मुवक्किल के पक्ष में उचित अंतरिम राहत दिए जाने की मांग की।
याचिका के अनुसार CAT ने अंतरिम राहत की मांग स्वीकार या खारिज करने के बजाय एडवोकेट के आचरण को 'दुर्व्यवहार' मानते हुए उनके खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी की और 7,000 रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा कराने का आदेश दिया।
आरोप है कि अधिकरण ने यह निष्कर्ष निकाला कि वकील ने अदालत पर दबाव बनाने या उसे आवश्यक अंतरिम आदेश पारित करने के लिए मजबूर करने की कोशिश की।
एडवोकेट ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि अपने मुवक्किल के हितों की रक्षा करना और मामले में उचित अंतरिम राहत की मांग करना एडवोकेट का कर्तव्य है। केवल अंतरिम राहत की मांग किए जाने को अपने आप में दुर्व्यवहार नहीं माना जा सकता।
याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि किसी वकील के खिलाफ पेशेवर दुर्व्यवहार का अंतिम निष्कर्ष निकालने का अधिकार अधिकरण या किसी अन्य अदालत को नहीं है। एडवोकेट एक्ट 1961 के तहत वैध कार्यवाही शुरू होने के बाद इस तरह के मामले में राज्य बार काउंसिल की अनुशासन समिति ही निर्णय ले सकती है। इसलिए CAT द्वारा एडवोकेट के खिलाफ दुर्व्यवहार का निष्कर्ष दर्ज करना उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर था।
याचिका में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया। वकील का कहना था कि उनके खिलाफ दुर्व्यवहार का निष्कर्ष दर्ज करने से पहले न तो कारण बताओ नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिला।
इन्हीं आधारों पर एडवोकेट ने कैट के आदेश में दर्ज दुर्व्यवहार संबंधी टिप्पणी और 7,000 रुपये की राशि जमा कराने का निर्देश रद्द करने की मांग की।
हाईकोर्ट ने मामले में प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए फिलहाल चुनौती दिए गए आदेश के संचालन पर रोक लगाई।
मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 को होगी।


