गवाहों को धमकाना या सामाजिक बहिष्कार करना कानून के राज पर हमला, जांच अधिकारी तत्काल करें कार्रवाई: राजस्थान हाईकोर्ट

Amir Ahmad

30 July 2026 12:07 PM IST

  • गवाहों को धमकाना या सामाजिक बहिष्कार करना कानून के राज पर हमला, जांच अधिकारी तत्काल करें कार्रवाई: राजस्थान हाईकोर्ट

    राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि गवाहों को धमकाना, उन पर दबाव बनाना या उनका सामाजिक बहिष्कार करना कानून के शासन की मूल भावना पर सीधा प्रहार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच के दौरान गवाहों को डराने-धमकाने या सामाजिक रूप से अलग-थलग करने का प्रयास आपराधिक न्याय व्यवस्था में गंभीर हस्तक्षेप है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    जस्टिस फरजंद अली की एकल पीठ ने जांच अधिकारी (IO) को निर्देश दिया कि यदि किसी गवाह की ओर से धमकी, दबाव या सामाजिक बहिष्कार की शिकायत दी जाती है तो उसका निष्पक्ष और शीघ्र परीक्षण किया जाए तथा कानून के अनुसार आवश्यक रोकथाम, सुरक्षा और दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

    अदालत ने कहा,

    "जांच में बाधा डालने, गवाहों को आतंकित करने या गैरकानूनी सामाजिक दंड लागू करने की किसी भी कोशिश को अत्यंत गंभीरता से देखा जाएगा और सक्षम अधिकारी कानून के अनुरूप कार्रवाई करने के लिए बाध्य होंगे।"

    मामला एक ऐसे व्यक्ति की याचिका से जुड़ा था, जिसने दूसरी जाति की महिला से विवाह किया। याचिकाकर्ता का आरोप था कि इसके बाद पालीवाल समाज ने उसके परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया।

    याचिका में कहा गया कि उसे और उसके परिवार को बंधक बनाकर अपमानित किया गया, धमकियां दी गईं, सामाजिक रूप से अलग-थलग किया गया और एक लाख रुपये का जुर्माना देने के लिए मजबूर किया गया। साथ ही 21 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग भी की गई। परिवार को सामाजिक संबंध रखने से भी रोका गया और जान का खतरा बताया गया। इसके आधार पर आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई।

    याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उसे जांच अधिकारी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं है, लेकिन आरोपी लगातार स्वतंत्र गवाहों को धमका रहे हैं, उन पर दबाव बना रहे हैं और उनका सामाजिक बहिष्कार कर जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।

    इन दलीलों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि पहले दिए गए न्यायिक निर्देशों का उद्देश्य केवल निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना नहीं था, बल्कि समाज में प्रचलित दबाव, धमकी और सामाजिक बहिष्कार जैसी गैरकानूनी प्रथाओं को समाप्त करना भी था।

    अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि गवाह इस प्रकार की शिकायत जांच अधिकारी को देते हैं तो उनकी अनदेखी नहीं की जा सकती। जांच अधिकारी को शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुसार आवश्यक सुरक्षा, निवारक और दंडात्मक कदम उठाने होंगे।

    इन्हीं निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण किया।

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