अवैध खनन में जब्त वाहन की रिहाई के लिए देनी होगी तय राशि, लंबित आपराधिक मुकदमे का नहीं पड़ेगा असर: राजस्थान हाईकोर्ट
Amir Ahmad
3 Sept 2026 12:01 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने अवैध खनन और अवैध रूप से खनिजों के परिवहन में इस्तेमाल वाहनों की जब्ती को लेकर अहम फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राजस्थान लघु खनिज रियायत नियम 2017 के तहत जब्ती की कार्यवाही और आपराधिक मुकदमा अलग-अलग और स्वतंत्र रूप से चलते हैं। आपराधिक मुकदमा लंबित होने के आधार पर जब्त वाहन की रिहाई की कार्यवाही को रोका नहीं जा सकता।
जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की पीठ ने कहा कि जब जब्ती की कार्यवाही शुरू हो चुकी हो और वाहन से संबंधित वैधानिक देयता निर्धारित कर दी गई हो तो वाहन को केवल व्यक्तिगत मुचलके या सुपुर्दगी के आधार पर रिहा नहीं किया जा सकता। वाहन की रिहाई के लिए नियमों के तहत निर्धारित राशि का भुगतान करना होगा।
मामला उन याचिकाओं से जुड़ा था जिनमें न्यायिक मजिस्ट्रेटों के उन आदेशों को चुनौती दी गई, जिनके तहत अवैध खनन से जुड़े मामलों में जब्त वाहनों को केवल व्यक्तिगत सुरक्षा या सुपुर्दगी के आधार पर छोड़ने से इनकार किया गया। संबंधित वाहनों और मशीनों पर अवैध खनन या अवैध रूप से खनिजों के परिवहन में इस्तेमाल होने के आरोप थे। इनमें बड़ी संख्या में बजरी से जुड़े मामले शामिल थे।
कई मामलों में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत FIR दर्ज की थी। इसके साथ ही खनन नियमों के तहत वाहनों की जब्ती की कार्यवाही भी शुरू की गई। याचिकाकर्ताओं ने वाहन छुड़ाने के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा देने की पेशकश की थी, लेकिन मजिस्ट्रेटों ने आवेदन खारिज कर दिए। उनका कहना था कि नियम 54 और 60 के तहत निर्धारित खनिज की कीमत, समझौता राशि और राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देशों के तहत देय पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति जमा किए बिना वाहन नहीं छोड़ा जा सकता।
याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि आपराधिक मुकदमे के नतीजे से पहले जब्ती की कार्यवाही पूरी नहीं मानी जा सकती। उनका यह भी कहना था कि केवल वाहन जब्त कर नोटिस जारी कर देने से जब्ती की कार्यवाही शुरू नहीं मानी जा सकती, बल्कि इसके लिए मजिस्ट्रेट के समक्ष औपचारिक कार्यवाही होना जरूरी है।
राज्य सरकार की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि नियम 54 के तहत संबंधित व्यक्ति को निर्धारित राशि जमा करने के लिए तीन महीने का अवसर दिया जाता है। यह अवधि केवल वैधानिक देयता चुकाने का अवसर है। राशि जमा नहीं करने पर आगे वाहन की जब्ती की कार्यवाही होती है। विभाग की ओर से नोटिस जारी किए जाने के साथ ही प्रक्रिया शुरू हो जाती है और मजिस्ट्रेट का बाद में पारित आदेश उस कार्यवाही का अंतिम चरण होता है।
हाईकोर्ट ने राज्य की दलील स्वीकार करते हुए कहा कि तीन महीने की अवधि का उद्देश्य संबंधित व्यक्ति को अपराध का समझौता करने और वैधानिक देयता चुकाने का अवसर देना है। इसका यह अर्थ नहीं है कि इस अवधि के दौरान जब्ती की कार्यवाही शुरू ही नहीं हुई।
कोर्ट ने कहा कि जब देयता निर्धारित कर दी गई हो और संबंधित व्यक्ति को मांग तथा निर्धारित राशि जमा नहीं करने के परिणामों की जानकारी देने वाला नोटिस जारी हो चुका हो, तब जब्त वाहन की रिहाई के सवाल पर जब्ती की प्रक्रिया शुरू मानी जाएगी। अंतिम जब्ती आदेश बाद में पारित होने से यह नहीं कहा जा सकता कि कार्यवाही पहले शुरू नहीं हुई।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यदि याचिकाकर्ताओं की दलील मान ली जाए तो व्यक्ति जानबूझकर निर्धारित राशि जमा नहीं करेगा और केवल व्यक्तिगत सुरक्षा देकर वाहन छुड़ाने की कोशिश करेगा। इससे खनन कानूनों के तहत बनाए गए पूरे वैधानिक तंत्र का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आपराधिक मुकदमा और खनन कानूनों के तहत जब्ती की कार्यवाही के उद्देश्य अलग हैं। आपराधिक मुकदमे में व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी और सजा का निर्धारण होता है, जबकि जब्ती की कार्यवाही अवैध गतिविधि में इस्तेमाल संपत्ति या वाहन से निपटने और उसके दोबारा गैरकानूनी इस्तेमाल को रोकने के लिए होती है।
हाईकोर्ट ने कहा कि अवैध खनन का पर्यावरण और सार्वजनिक संसाधनों पर गंभीर असर पड़ता है। इससे प्राकृतिक संसाधनों का नुकसान, पर्यावरणीय क्षति और सरकारी राजस्व की हानि होती है। ऐसे में केवल आपराधिक मुकदमा लंबित होने के आधार पर खनन कानूनों के तहत वसूली और जब्ती की कार्यवाही को रोकना कानून के उद्देश्य को कमजोर करेगा।
कोर्ट ने पाया कि इन मामलों में नियमों के तहत नोटिस जारी किए जा चुके थे और संबंधित वाहनों की वैधानिक देयता भी निर्धारित हो चुकी थी। इसलिए सभी मामलों में जब्ती की कार्यवाही शुरू हो चुकी थी।
हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेटों के आदेशों में कोई कानूनी खामी नहीं पाते हुए सभी याचिकाएं खारिज कीं। अब इन मामलों में जब्त वाहनों की रिहाई केवल निर्धारित वैधानिक राशि का भुगतान करने के बाद ही संभव होगी।


