रेप के दोषी आसाराम की ओपन एयर कैंप में शिफ्टिंग पर 3 सप्ताह में फैसला ले अधिकारी: राजस्थान हाईकोर्ट
Amir Ahmad
6 Nov 2026 12:12 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के दोषी आसाराम की ओपन एयर कैंप में स्थानांतरण की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सक्षम प्रशासनिक प्राधिकारी को तीन सप्ताह के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया।
जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने कहा कि हाईकोर्ट की हालिया पूर्ण पीठ के फैसले के मद्देनजर आसाराम के आवेदन पर निर्णय लिया जाना चाहिए।
पूर्ण पीठ ने स्पष्ट किया था कि दुष्कर्म या पॉक्सो एक्ट के दोषी कैदियों को ओपन एयर कैंप में भेजे जाने से पूरी तरह अयोग्य नहीं माना जा सकता।
आसाराम की ओर से ओपन एयर कैंप में स्थानांतरण के लिए आवेदन दाखिल किया गया। इसमें दलील दी गई कि वह रिमिशन सहित 13 साल से अधिक समय जेल में बिता चुका है, जो उसकी मूल सजा की एक-तिहाई अवधि से ज्यादा है। इसके अलावा जेल में उसका आचरण संतोषजनक पाया गया। इसलिए वह ओपन एयर कैंप में स्थानांतरण के लिए विचार किए जाने का पात्र है।
हालांकि, जयपुर की ओपन एयर कैंप सलाहकार समिति ने उसका आवेदन खारिज किया था। समिति ने कहा कि आसाराम को आईपीसी की धारा 376(2)(f) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, इसलिए वह ओपन एयर कैंप में स्थानांतरण के लिए पात्र नहीं है। इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में मौजूदा याचिका दायर की गई।
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि आवेदन खारिज करते समय संबंधित अधिकारियों ने मामले पर उचित विचार नहीं किया। इसी तरह की स्थिति वाले अन्य कैदियों को ओपन एयर कैंप में स्थानांतरित किया गया है। ऐसे में आसाराम को समान लाभ से वंचित करना मनमाना है।
इसके विपरीत, राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि आईपीसी की धारा 376 और 377 तथा POCSO Act के तहत दोषसिद्धि को देखते हुए राजस्थान प्रिजनर्स ओपन एयर कैंप रूल्स, 1972 के नियम 3(d) और 4(a) के तहत आसाराम सामान्य रूप से पात्र नहीं है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने गंगाराम बनाम राजस्थान राज्य (क्रिमिनल रेफरेंस संख्या 1/2024) में हाल ही में दिए गए पूर्ण पीठ के फैसले पर विचार किया।
चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल, जस्टिस समीर जैन और जस्टिस प्रवीर भटनागर की पूर्ण पीठ ने कहा था,
“आईपीसी की धारा 376 या पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी ठहराया गया कैदी ओपन एयर कैंप में स्थानांतरण के लिए पूरी तरह अयोग्य नहीं है। हालांकि, ऐसे कैदी को ओपन एयर कैंप में प्रवेश का स्वतः अधिकार नहीं है। अपराध की प्रकृति और गंभीरता, पीड़ित की उम्र तथा मामले के तथ्यों पर सलाहकार समिति विचार कर सकती है। समिति को कैदी के जेल में आचरण, सुधार की संभावना, जोखिम और समाज में दोबारा शामिल होने की तैयारी का व्यक्तिगत आधार पर और कारणों सहित आकलन करना होगा। ओपन एयर कैंप में स्थानांतरण के निर्णय के कारण भी दर्ज करने होंगे।”
हाईकोर्ट ने इस फैसले के संदर्भ में जानकारी ली तो पता चला कि प्रशासनिक स्तर पर अभी तक आसाराम के आवेदन पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। अदालत ने अपेक्षा जताई कि इस संबंध में तीन सप्ताह के भीतर निर्णय ले लिया जाएगा।
अंततः हाईकोर्ट ने अपने आदेश की प्रति सक्षम प्राधिकारी को भेजने का निर्देश दिया, ताकि वह तीन सप्ताह के भीतर प्रशासनिक स्तर पर उचित निर्णय लेकर आवश्यक आदेश पारित कर सके।

