क्या लॉ डिपार्टमेंट का JDA के लॉ ऑफिसर पर प्रशासनिक नियंत्रण नहीं? राजस्थान हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर आरोपपत्रों पर लगाई रोक
Amir Ahmad
24 Aug 2026 3:48 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर विकास प्राधिकरण में तैनात लॉ ऑफिसर के खिलाफ विधि एवं विधिक कार्य विभाग की ओर से शुरू की गई विभागीय कार्रवाई के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया।
जस्टिस अनूरूप सिंघी की पीठ ने अधिकारी के खिलाफ जारी दो आरोपपत्रों के प्रभाव और क्रियान्वयन पर भी रोक लगाई।
मामला नरेंद्र कुमार आर्य की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। उन्होंने विधि एवं विधिक कार्य विभाग के प्रमुख सचिव की ओर से 30 जुलाई 2026 को जारी किए गए दोनों आरोपपत्रों को चुनौती दी।
याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि वह जयपुर विकास प्राधिकरण में तैनात हैं और विधि एवं विधिक कार्य विभाग के सीधे प्रशासनिक नियंत्रण में नहीं आते। ऐसे में विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करना अधिकार क्षेत्र और सक्षम प्राधिकारी के अभाव में है।
पहला आरोपपत्र गौरव कुमार गुप्ता के खिलाफ याचिकाकर्ता द्वारा शुरू की गई कार्रवाई से संबंधित है। इस कार्रवाई के बाद 18 मई 2026 को गुप्ता की सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी किया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार सेवा समाप्ति का यह आदेश जयपुर विकास प्राधिकरण के आयुक्त की अंतिम स्वीकृति के बाद पारित हुआ था।
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि गुप्ता ने सेवा समाप्ति के आदेश को पहले ही हाईकोर्ट में चुनौती दे रखी है और वह मामला अभी लंबित है। ऐसे में उसी विषय को आधार बनाकर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करना उचित नहीं है।
दूसरा आरोपपत्र हाईकोर्ट की समन्वय पीठ द्वारा 25 मार्च 2026 को पारित आदेश के कथित अनुपालन नहीं किए जाने से संबंधित है। याचिकाकर्ता ने बताया कि जयपुर विकास प्राधिकरण ने इस आदेश को खंडपीठ के समक्ष विशेष अपील के माध्यम से चुनौती दी थी।
उन्होंने बताया कि खंडपीठ ने 5 अगस्त 2026 को अंतरिम आदेश पारित करते हुए 25 मार्च के आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर रोक लगाई थी। ऐसे में दूसरे आरोपपत्र का आधार बना मामला भी न्यायिक विचाराधीन है।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि दोनों आरोपपत्र ऐसे अधिकारी द्वारा जारी किए गए हैं जिसके पास जयपुर विकास प्राधिकरण में तैनात विधि अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का प्रशासनिक अधिकार नहीं है। इसलिए आरोपपत्र जारी करने वाले प्राधिकारी की क्षमता और अधिकार क्षेत्र पर गंभीर सवाल उठता है।
याचिका में जयपुर विकास प्राधिकरण अधिनियम 1982 की धारा 78 का भी हवाला दिया गया। इस प्रावधान के तहत प्राधिकरण और उसके अधिकारियों को कानून के अनुसार तथा सद्भावना से उचित सावधानी और ध्यान के साथ किए गए कार्यों के संबंध में संरक्षण प्रदान किया गया।
याचिकाकर्ता की दलीलों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और उनके खिलाफ जारी दोनों आरोपपत्रों के प्रभाव तथा क्रियान्वयन पर रोक लगाई।
अब मामले में आगे की सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण सवाल सामने रहेगा कि जयपुर विकास प्राधिकरण में तैनात विधि अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का अधिकार विधि एवं विधिक कार्य विभाग के पास है या नहीं।


