दोषसिद्धि पर पहले ही रोक, फिर भी कर्मचारी की सेवा समाप्ति पर राजस्थान हाईकोर्ट ने लगाई रोक
Amir Ahmad
20 Aug 2026 11:57 AM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने आपराधिक मामले में दोषसिद्धि की जानकारी छिपाने के आरोप में बर्खास्त किए गए सरकारी कर्मचारी को अंतरिम राहत देते हुए उसकी सेवा समाप्ति के आदेश पर रोक लगाई। अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए कहा कि अगली सुनवाई तक सेवा समाप्ति के आदेश का प्रभाव और क्रियान्वयन स्थगित रहेगा।
जस्टिस अनूप सिंघी की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए इस तथ्य पर गौर किया कि कर्मचारी की दोषसिद्धि पर पहले ही हाईकोर्ट की समकक्ष पीठ रोक लगा चुकी थी। उस आदेश में अदालत ने कहा कि दोषसिद्धि को प्रभावी रहने देने से सरकारी कर्मचारी के सेवाकाल और भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है तथा उसे अपूरणीय नुकसान हो सकता है।
कर्मचारी ने 30 जुलाई 2026 को जारी सेवा समाप्ति के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उसके खिलाफ आरोप है कि उसने आपराधिक मामले में अपनी दोषसिद्धि से जुड़ी जानकारी को छिपाया और सही तथ्य सामने नहीं रखे।
कर्मचारी की ओर से दलील दी गई कि संबंधित प्रपत्र भरते समय उससे पूछा गया कि क्या वह कभी अपराधी रहा है। उसने इसका जवाब 'नहीं' में दिया था। उसका कहना था कि उस समय दिया गया जवाब तथ्यात्मक रूप से गलत नहीं था।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि हाईकोर्ट की समकक्ष पीठ उसकी दोषसिद्धि पर पहले ही रोक लगा चुकी थी। ऐसे में उसने घोषणा और शपथपत्र सद्भावना में इस विश्वास के साथ दिया कि दोषसिद्धि के प्रभाव पर रोक लगी हुई।
कर्मचारी ने सेवा समाप्ति के आदेश को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ भी बताया। उसकी ओर से कहा गया कि सेवा समाप्त करने से पहले उसे कोई पूर्व सूचना या अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया।
इन दलीलों पर विचार करने के बाद जस्टिस अनूप सिंघी की पीठ ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और 30 जुलाई को जारी सेवा समाप्ति के आदेश के प्रभाव तथा उसके क्रियान्वयन पर अगली सूचना तक रोक लगाई।
मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को होगी।


