NDPS मामले में आरोपी नहीं है मालिक तो सिर्फ वाहन का रजिस्ट्रेशन न होना अंतरिम सुपुर्दगी रोकने का आधार नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
Amir Ahmad
29 July 2026 12:16 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी NDPS मामले में वाहन का मालिक आरोपी नहीं है तो केवल इस आधार पर कि वाहन का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है, उसे अंतरिम सुपुर्दगी देने से इनकार नहीं किया जा सकता।
जस्टिस अनूप कुमार ढांड की सिंगल बेंच ने NDPS मामले में जब्त अपंजीकृत कार को उसके मालिक के सुपुर्द करने का आदेश दिया। हालांकि, अदालत ने शर्त रखी कि वाहन मालिक 30 दिनों के भीतर उसका पंजीकरण कराएगा और तब तक उसे सार्वजनिक सड़क पर नहीं चलाएगा।
मामला उस याचिका से जुड़ा था जिसमें ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसके जरिए वाहन की सुपुर्दगी का आवेदन यह कहते हुए खारिज किया कि याचिकाकर्ता वाहन का रजिस्टर्ड मालिक नहीं है।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वह संबंधित NDPS मामले में आरोपी नहीं है और कथित घटना से उसका कोई संबंध नहीं है। यदि वाहन लंबे समय तक थाने में पड़ा रहेगा तो उसकी स्थिति खराब होगी और उसकी कीमत भी घट जाएगी।
वहीं राज्य सरकार ने दलील दी कि भले ही वाहन याचिकाकर्ता ने खरीदा हो लेकिन उसका परिवहन विभाग में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया। इसलिए वाहन उसके सुपुर्द नहीं किया जा सकता।
दोनों पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम 1988 (MV Act) की धारा 39 के अनुसार किसी भी अपंजीकृत वाहन को सार्वजनिक स्थान पर चलाना कानूनन प्रतिबंधित है।
अदालत ने कहा,
"वाहन का रजिस्ट्रेशन वह कानूनी प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से वाहन का सरकारी अभिलेखों में रजिस्ट्रेशन होता है। इससे वाहन को एक विशिष्ट रजिस्ट्रेशन नंबर मिलता है और उसके मालिक का नाम व पता उससे जुड़ जाता है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि वाहन सड़क सुरक्षा, कर और पर्यावरण संबंधी सभी मानकों का पालन करता हो।"
हाईकोर्ट ने बिश्वजीत डे बनाम असम राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया। अदालत ने कहा कि यदि किसी वाहन का मालिक NDPS मामले में आरोपी नहीं है और यह आरोप भी नहीं है कि उसकी जानकारी या मिलीभगत से वाहन में मादक पदार्थ रखा या ले जाया गया तो सामान्यतः वह वाहन की अंतरिम सुपुर्दगी पाने का हकदार होगा।
इसी सिद्धांत को लागू करते हुए हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ न तो आरोपपत्र दाखिल हुआ है और न ही उसे मामले में आरोपी बनाया गया। ऐसे में वह वाहन की अंतरिम सुपुर्दगी पाने का अधिकारी है।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए निर्धारित शर्तों के साथ वाहन याचिकाकर्ता को अंतरिम सुपुर्दगी पर सौंपने का निर्देश दिया।


