ऑनलाइन घोटाल: राजस्थान हाईकोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी के आरोपियों की तीसरी जमानत याचिका खारिज की

  • ऑनलाइन घोटाल: राजस्थान हाईकोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी के आरोपियों की तीसरी जमानत याचिका खारिज की

    राजस्थान हाईकोर्ट ने साइबर अपराध के एक मामले में दो आरोपियों द्वारा दायर तीसरी जमानत याचिका खारिज की। कोर्ट ने कहा कि ऑनलाइन धोखाधड़ी में भारी बढ़ोतरी के बीच, डिजिटल घोटाले साइबर अपराध के सबसे खतरनाक रूपों में से एक बनकर उभरे हैं।

    जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने कहा कि बैंक ग्राहकों को निशाना बनाने वाले फिशिंग घोटाले सबसे व्यापक साइबर अपराधों में से एक हैं।

    जज ने कहा,

    "साइबर अपराधी वित्तीय लाभ के लिए बैंक खातों तक पहुंचने के लिए लॉगिन क्रेडेंशियल (यूजरनेम और पासवर्ड) चुरा लेते हैं और क्रेडिट व डेबिट कार्ड की जानकारी हासिल कर लेते हैं, जिससे पीड़ितों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।"

    बता दें कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जो पुलिस अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज एक मामले में आरोपियों द्वारा तीसरी बार दायर की गई थीं।

    जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए राज्य सरकार ने कहा कि याचिकाकर्ता अन्य आरोपियों के साथ मिलकर साइबर अपराध में शामिल थे। सरकार ने यह भी बताया कि याचिकाकर्ताओं में से एक करण यादव के खिलाफ साइबर अपराध से जुड़ी सात और शिकायतें दर्ज हैं। राज्य ने यह भी बताया कि याचिकाकर्ताओं की पिछली दो जमानत याचिकाएं पहले ही खारिज हो चुकी हैं और मामले के तथ्यों या परिस्थितियों में कोई खास बदलाव नहीं आया।

    याचिकाओं पर विचार करते हुए कोर्ट ने अपनी उन टिप्पणियों को याद किया, जो उसने पहली जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की थीं, जिसमें साइबर अपराधों और ऑनलाइन धोखाधड़ी में हो रही बढ़ोतरी का जिक्र किया गया।

    अदालत ने कहा,

    "याचिकाकर्ताओं की पहली जमानत याचिका पर सुनवाई करते समय, कोर्ट ने माना कि वैश्विक स्तर पर साइबर अपराधों और धोखाधड़ी में काफी बढ़ोतरी हुई है। भारत में भी हजारों निर्दोष लोग ऐसे घोटालों का शिकार हुए। इनमें से कई लोगों ने इंटरनेट के जरिए हुई धोखाधड़ी में अपनी मेहनत की कमाई का एक बड़ा हिस्सा गंवा दिया। डिजिटल घोटालों के मामलों में यह उछाल चिंताजनक चलन को दर्शाता है, जिसमें हर वर्ग के लोग तेजी से निशाना बनाए जा रहे हैं।"

    परिस्थितियों में कोई खास बदलाव न होने अपराध की गंभीरता और याचिकाकर्ताओं पर लगे आरोपों को देखते हुए कोर्ट ने उनकी तीसरी जमानत याचिका खारिज की। साथ ही कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह इस मामले की सुनवाई जल्द-से-जल्द पूरी करने की पूरी कोशिश करे।

    साथ ही इस बात का ध्यान रखे कि जमानत आदेश में की गई टिप्पणियों का ट्रायल पर कोई असर न पड़े।

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