नगर निकाय चुनाव में नामांकन खारिज होने को सिर्फ चुनाव याचिका से चुनौती दी जा सकती है: राजस्थान हाईकोर्ट
Amir Ahmad
17 Sept 2026 12:14 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने नगर निकाय चुनाव में नामांकन पत्र खारिज किए जाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज करते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया को चुनौती देने के लिए संविधान के अनुच्छेद 243-ZG के तहत विशेष रोक लागू है। नामांकन पत्र के गलत तरीके से खारिज किए जाने का मामला भी चुनाव से जुड़ा है और इसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत चुनाव याचिका के जरिए ही चुनौती दी जा सकती है।
जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 31 के तहत नामांकन पत्र को अनुचित तरीके से स्वीकार या खारिज करना चुनाव को शून्य घोषित करने का आधार हो सकता है। ऐसे में हाईकोर्ट के पास रिट याचिका के जरिए इस मामले की जांच करने का अधिकार नहीं है।
मामला डीग जिले के बृज नगर नगरपालिका बोर्ड के वार्ड सदस्य पद के चुनाव से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने रिटर्निंग ऑफिसर के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उसका नामांकन पत्र खारिज कर दिया गया। नामांकन खारिज करने की वजह याचिकाकर्ता के खिलाफ लंबित आपराधिक मामला और नामांकन में इसकी जानकारी नहीं देना बताया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि नामांकन पत्र खारिज करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का कोई अवसर नहीं दिया गया। इसलिए रिटर्निंग ऑफिसर का आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एनपी पुन्नुस्वामी बनाम रिटर्निंग ऑफिसर, नमक्कल निर्वाचन क्षेत्र एवं अन्य मामले में दिए गए फैसले का उल्लेख किया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव का अर्थ केवल अंतिम परिणाम नहीं है बल्कि इसमें पूरी चुनाव प्रक्रिया शामिल होती है। इसमें नामांकन पत्र को स्वीकार या खारिज करने की प्रक्रिया भी शामिल है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 में नामांकन पत्र के अनुचित तरीके से खारिज किए जाने और अनुचित तरीके से स्वीकार किए जाने, दोनों को चुनाव को शून्य घोषित करने के आधार के रूप में रखा गया।
पीठ ने कहा कि इन प्रावधानों को देखते हुए याचिकाकर्ता के पास चुनाव याचिका दायर करने का वैधानिक उपाय उपलब्ध है। संविधान के अनुच्छेद 243-जेडजी के तहत किसी नगरपालिका के चुनाव को सामान्य न्यायिक कार्यवाही के जरिए चुनौती नहीं दी जा सकती, बल्कि इसके लिए कानून में निर्धारित चुनाव याचिका का रास्ता अपनाना होगा।
हाईकोर्ट ने इसी आधार पर रिट याचिका का निस्तारण करते हुए याचिकाकर्ता को चुनाव याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दी।


