नगर निकाय चुनाव आरक्षण पर याचिका खारिज, राजस्थान हाईकोर्ट ने माना अनुच्छेद 243-Z का प्रतिबंध

Amir Ahmad

27 Aug 2026 2:59 PM IST

  • नगर निकाय चुनाव आरक्षण पर याचिका खारिज, राजस्थान हाईकोर्ट ने माना अनुच्छेद 243-Z का प्रतिबंध

    राजस्थान हाईकोर्ट ने आगामी नगर निकाय चुनावों में सीटों के आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कीं। हाईकोर्ट ने कहा कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। ऐसे में संविधान के अनुच्छेद 243-Z के तहत अदालत के चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप पर रोक है।

    जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग के 19 अगस्त 2026 के आदेश से नगर निकाय चुनाव की तारीखें घोषित करने के साथ चुनाव कार्यक्रम भी अधिसूचित किया जा चुका था। इसलिए चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई और इस स्थिति में अनुच्छेद 243-जेड़ प्रभावी हो गया।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि राजस्थान नगरपालिका निर्वाचन नियमों के तहत नगर निकायों में विभिन्न श्रेणियों के लिए आरक्षित सीटों की सूची तैयार की गई और आरक्षण तय करने के लिए लॉटरी निकाली गई। बाद में बिना किसी सूचना के पहले किए गए निर्णय में बदलाव कर आरक्षण की नई प्रक्रिया अपनाई गई। याचिकाकर्ताओं ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की थी।

    याचिकाकर्ताओं का यह भी तर्क था कि अलग-अलग नगर निकायों के बीच आरक्षण के वितरण में समानता नहीं बरती गई और इसके लिए कोई उचित आधार नहीं बताया गया।

    सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से याचिकाओं की सुनवाई योग्यता पर प्रारंभिक आपत्ति उठाई गई। दलील दी गई कि 19 अगस्त 2026 को राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम घोषित कर चुका है। इसके साथ ही चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई। इसलिए संविधान के अनुच्छेद 243-जेड़ के तहत हाईकोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

    इसके जवाब में याचिकाकर्ताओं ने राजस्थान नगरपालिका निर्वाचन नियमों के नियम 10 का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया चुनाव कार्यक्रम घोषित होने की तारीख से नहीं, बल्कि चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद शुरू मानी जानी चाहिए। इस दलील के समर्थन में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख बनाम जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस मामले के फैसले का भी उल्लेख किया।

    हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। पीठ ने संविधान पीठ के फैसले एन.पी. पोन्नुस्वामी बनाम रिटर्निंग ऑफिसर, नमक्कल निर्वाचन क्षेत्र का हवाला देते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम जारी किए जाने के साथ चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाती है और उसके बाद अदालत को चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

    पीठ ने दोनों फैसलों के बीच अंतर बताते हुए कहा कि केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख मामले में फैसला सुप्रीम कोर्ट की दो जस्टिस की पीठ ने दिया, जबकि एन.पी. पोन्नुस्वामी मामले में फैसला छह जस्टिस की संविधान पीठ ने दिया। इसलिए बड़ी पीठ का फैसला प्रभावी होगा और मौजूदा मामलों पर भी वही लागू होगा।

    इसी आधार पर राजस्थान हाईकोर्ट ने नगर निकाय चुनावों में आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कीं।

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