दो नावों की सवारी नहीं कर सकते सरकारी डॉक्टर, राजस्थान हाईकोर्ट ने दो सरकारी पदों पर सेवा का अधिकार बनाए रखने की याचिका खारिज की
Amir Ahmad
9 Oct 2026 11:31 AM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने MCH की पढ़ाई पूरी करने के लिए दो साल तक सहायक आचार्य के पद पर कार्यभार ग्रहण करने की अवधि बढ़ाने की मांग करने वाले एक डॉक्टर की याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने कहा कि कोई सरकारी कर्मचारी एक ही समय में दो स्थायी सरकारी पदों पर अपना अधिकार बनाए नहीं रख सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि कार्यभार ग्रहण करने के लिए समय बढ़ाने की सुविधा प्रशासनिक जरूरतों या व्यक्तिगत कठिनाइयों के समाधान के लिए है। इसका इस्तेमाल नई नियुक्ति पर कार्यभार संभालने में जानबूझकर देरी करने या उच्च शिक्षा के दौरान एक साथ दो सरकारी पदों पर अधिकार बनाए रखने के लिए नहीं किया जा सकता।
मामले के अनुसार याचिकाकर्ता जयपुर के SMS अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज में मेडिकल अधिकारी के पद पर कार्यरत था। उसे मूत्र रोग विज्ञान में MCH की उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए अवकाश दिया गया। इसी दौरान उसका चयन टोंक के राजकीय मेडिकल कॉलेज में सामान्य शल्य चिकित्सा विभाग में सहायक आचार्य के पद पर हो गया।
डॉक्टर ने नई नियुक्ति पर कार्यभार ग्रहण करने के लिए दो साल का अतिरिक्त समय मांगा ताकि वह MCH की पढ़ाई पूरी कर सके। उसने इस अवधि के दौरान अपने मौजूदा पद से जुड़े अधिकार भी बनाए रखने की मांग की।
याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा,
“कोई सरकारी कर्मचारी एक समय में केवल एक ही स्थायी पद पर अपना अधिकार बनाए रख सकता है।”
अदालत ने कहा कि एक से अधिक पदों पर अधिकार बनाए रखने की कोशिश करना या कई रोजगार विकल्पों को एक साथ बनाए रखने के लिए नई सेवा में शामिल होने में जानबूझकर देरी करना आचरण नियमों का उल्लंघन है। ऐसी व्यवस्था का दुरुपयोग दूसरे योग्य अभ्यर्थियों के अवसर भी प्रभावित कर सकता है जो प्रतीक्षा सूची में हैं।
हाईकोर्ट ने यह भी ध्यान दिलाया कि टोंक के राजकीय मेडिकल कॉलेज में MBBS की सीटें 50 बढ़ाई गईं और इसके लिए पर्याप्त शिक्षकों की आवश्यकता है। यदि डॉक्टर को दो साल तक कार्यभार ग्रहण करने से छूट दी जाती है तो पद खाली रहेगा और विद्यार्थियों की पढ़ाई तथा प्रशिक्षण प्रभावित हो सकता है।
अदालत ने टिप्पणी की कि नई सेवा में कार्यभार ग्रहण करने के लिए दो साल का अतिरिक्त समय मांगकर याचिकाकर्ता एक ही समय में दो नावों की सवारी करने की कोशिश कर रहा है। इन्हीं टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने डॉक्टर की याचिका खारिज की।

