कक्षा 10वीं के खराब नतीजों के आधार पर शिक्षक को दंडित नहीं कर सकते, जब तक कदाचार साबित न हो: राजस्थान हाईकोर्ट
Amir Ahmad
4 Nov 2026 12:50 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने कक्षा 10वीं के गणित विषय में खराब परीक्षा परिणाम के लिए एक सरकारी शिक्षक पर लगाई गई सजा रद्द की।
कोर्ट ने कहा कि शिक्षक के खिलाफ कोई ऐसा विशिष्ट आरोप नहीं था, जिससे यह साबित हो कि उसकी किसी कार्रवाई या चूक के कारण विद्यार्थियों के नतीजे निर्धारित मानकों से नीचे रहे।
जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि परीक्षा परिणाम निर्धारित मानकों से नीचे रहने के कई कारण हो सकते हैं। जब तक यह साबित न हो कि परिणाम शिक्षक के किसी विशिष्ट कृत्य या चूक के कारण खराब हुए, तब तक उसे इसके लिए दंडित नहीं किया जा सकता।
मामले में याचिकाकर्ता शिक्षक को आरोप पत्र जारी किया गया। आरोप था कि उसकी ढिलाई और लापरवाही के कारण कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों का गणित विषय का परिणाम शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित मानकों से नीचे रहा।
इसके बाद राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम 17 के तहत शिक्षक की एक वार्षिक वेतनवृद्धि रोकने का दंड दिया गया। शिक्षक ने इस आदेश के खिलाफ अपील दायर की, जिसे भी खारिज किया गया। इसके बाद उसने दोनों आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सबसे पहले गौर किया कि चुनौती दिए गए आदेशों में कार्रवाई के कारण स्पष्ट नहीं किए गए। इन आदेशों में यह नहीं बताया गया कि संबंधित परीक्षा परिणाम के लिए शिक्षक को किस आधार पर जिम्मेदार ठहराया गया।
कोर्ट ने समन्वय पीठ के धर्मवीर बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य मामले में दिए गए फैसले का भी उल्लेख किया। उस फैसले में कहा गया कि किसी कर्मचारी के खिलाफ सेवा संबंधी कदाचार साबित करने के लिए उसकी ओर से किसी कृत्य का किया जाना या किसी आवश्यक कर्तव्य का पालन न करना जरूरी है। इसके अलावा, आरोप स्पष्ट और विशिष्ट होने चाहिए तथा उनमें कोई अस्पष्टता नहीं होनी चाहिए। कर्मचारी के खिलाफ कदाचार का आरोप उसके किसी विशेष कार्य, आचरण या चूक पर आधारित होना चाहिए। ऐसा न होने पर आरोप अस्पष्ट माना जाएगा।
इस पृष्ठभूमि में हाईकोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में शिक्षक के खिलाफ ऐसा कोई विशिष्ट आरोप नहीं लगाया गया था कि उसकी किसी कार्रवाई या चूक के कारण विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम खराब रहा। परिणाम निर्धारित स्तर से नीचे रहने के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।
इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने शिक्षक की याचिका स्वीकार कर ली और उसकी वेतनवृद्धि रोकने तथा अपील खारिज करने संबंधी दोनों आदेश रद्द कर दिए।

