बच्चे के जन्म के बाद नए स्कूल में जॉइन करने वाली शिक्षिका को 180 दिन का मातृत्व अवकाश दें: राजस्थान हाईकोर्ट

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    राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एक शिक्षिका को 180 दिन का मातृत्व अवकाश देने का निर्देश दिया, जिसने बच्चे के जन्म के बाद नए स्कूल में जॉइन किया। जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने अधिकारियों को मातृत्व अवकाश की अवधि का पूरा वेतन और उससे जुड़े सभी परिणामी लाभ देने का भी निर्देश दिया।

    कोर्ट शिक्षिका की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें राजस्थान सेवा नियम, 1951 के नियम 103 के तहत मातृत्व अवकाश देने के लिए राज्य के अधिकारियों को निर्देश जारी करने की मांग की गई।

    याचिकाकर्ता बाड़मेर जिले में शिक्षिका के पद पर तैनात थीं, जब वह गर्भवती हुईं। उन्होंने 34 दिन के मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया, जिसे मंजूरी दी गई। सितंबर 2023 में बच्चे को जन्म देने के बाद उन्होंने 6 अक्टूबर 2023 को खैरथल-तिजारा जिले के एक नए स्कूल में कार्यभार संभाला।

    नए स्कूल में जॉइन करने के बाद शिक्षिका ने पूरे 180 दिन के मातृत्व अवकाश की मांग की, लेकिन कथित तौर पर उनके अनुरोध पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने तीन बार चाइल्ड केयर लीव यानी बाल देखभाल अवकाश के लिए आवेदन किया, जिन्हें अधिकारियों ने मंजूरी दी। हालांकि, मातृत्व अवकाश और संबंधित अवधि के वेतन को लेकर विवाद पैदा होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।

    मामले पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने राजस्थान सेवा नियम, 1951 के नियम 103 का परीक्षण किया। कोर्ट ने कहा कि इस नियम के तहत महिला सरकारी कर्मचारी को दो अवसरों पर 180 दिन तक का मातृत्व अवकाश दिया जा सकता है।

    मातृत्व अवकाश के उद्देश्य पर जोर देते हुए कोर्ट ने कहा कि इसका मकसद केवल मां और बच्चे के स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरतों का ध्यान रखना नहीं है, बल्कि दोनों के बीच भावनात्मक संबंध विकसित करने के लिए आवश्यक समय उपलब्ध कराना भी है।

    हाईकोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में मातृत्व का अधिकार और प्रत्येक बच्चे के पूर्ण विकास का अधिकार भी शामिल है।

    कोर्ट ने टिप्पणी की,

    “यदि मातृत्व का अर्थ मां बनना है, तो मातृत्व अवकाश का उद्देश्य महिला और उसके बच्चे के पूर्ण एवं स्वस्थ पालन-पोषण की व्यवस्था करके मातृत्व की गरिमा की रक्षा करना है। मातृत्व अवकाश महिलाओं के लिए सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दिया जाता है, क्योंकि मातृत्व और बचपन दोनों को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। इस अवकाश के दौरान मां और बच्चे के स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं पर ध्यान देने के साथ-साथ दोनों के बीच स्नेह का संबंध विकसित करने का अवसर भी दिया जाता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में मातृत्व का अधिकार और प्रत्येक बच्चे के पूर्ण विकास का अधिकार भी शामिल है।”

    मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार की। कोर्ट ने राज्य के अधिकारियों को 1 सितंबर 2023 से शिक्षिका को 180 दिन का मातृत्व अवकाश देने का निर्देश दिया। साथ ही स्पष्ट किया कि इस अवधि को सेवा में व्यवधान या सेवा टूटने के रूप में नहीं माना जाएगा। अधिकारियों को संबंधित अवधि का पूरा वेतन और सभी परिणामी लाभ देने का भी आदेश दिया गया।

    कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि शिक्षिका पहले जो चाइल्ड केयर लीव ले चुकी हैं, उसे मातृत्व अवकाश की अवधि में शामिल नहीं किया जाएगा। पहले इस्तेमाल किए गए बाल देखभाल अवकाश को उनके चाइल्ड केयर लीव खाते में दोबारा जमा किया जाए, ताकि मातृत्व अवकाश और बाल देखभाल अवकाश का लाभ अलग-अलग बना रहे।

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