जवाबदेही तय नहीं हुई तो पेपरलेस कोर्ट का सपना कागजों पर ही रहेगा, राजस्थान हाईकोर्ट ने दस्तावेज अपलोड में लापरवाही पर जताई नाराजगी
Amir Ahmad
10 Sept 2026 12:24 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने मुकदमों की फाइलों को डिजिटल करने और दस्तावेजों को पेपरलेस मॉड्यूल पर अपलोड करने में बरती जा रही सुस्त और लापरवाह कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है।
जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि दस्तावेज समय पर अपलोड नहीं होने से पेपरलेस तरीके से काम कर रही अदालतों को परेशानी होती है और पेपरलेस कोर्ट की पूरी व्यवस्था का उद्देश्य ही प्रभावित होता है।
पीठ ने कहा कि 2 नवंबर 2020 को रजिस्ट्रार जनरल की ओर से जारी स्थायी आदेश में अब उचित संशोधन की जरूरत है। यह आदेश फिलहाल आपराधिक मामलों की फाइलों की स्कैनिंग से जुड़ा है, लेकिन अब इसे सिविल, आपराधिक, रिट और अन्य सभी मामलों पर लागू किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने कहा कि अदालतों में पेपरलेस मॉड्यूल लागू करना तेज, पारदर्शी और सुलभ न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि न्याय देने की व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन है। इससे समय की बचत होती है रजिस्ट्री पर काम का बोझ कम होता है, रिकॉर्ड खोने की आशंका घटती है और दस्तावेज 24 घंटे उपलब्ध रहते हैं।
मामले की सुनवाई पेपरलेस मॉड्यूल 2.0 के जरिए हो रही थी। इस दौरान पता चला कि मुख्य याचिका पोर्टल पर अपलोड ही नहीं की गई और केवल स्थगन की मांग वाली याचिका अपलोड की गई। इसके बाद कोर्ट ने संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा।
संबंधित क्लर्क और अदालत की मुकदमा फाइलों की स्कैनिंग व डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने का काम करने वाली कंपनी एनहिरा सॉफ्टवेयर (एक्सपोर्ट) लिमिटेड ने अपना जवाब दाखिल किया, जिसे कोर्ट ने असंतोषजनक पाया।
पीठ ने कहा कि लगभग हर दिन पेपरलेस मॉड्यूल पर अदालत के दस्तावेज अपलोड करने के लिए जिम्मेदार लोगों की ओर से इसी तरह की लापरवाही सामने आती है। इससे पेपरलेस व्यवस्था के तहत काम कर रही अदालतों के लिए मुश्किलें पैदा होती हैं।
हालांकि, कोर्ट ने मामले में नरम रुख अपनाते हुए संबंधित लोगों को चेतावनी दी कि भविष्य में याचिकाओं, दस्तावेजों, जवाब, प्रत्युत्तर, आवेदनों और अतिरिक्त हलफनामों को संबंधित वकीलों या पक्षकारों की ओर से पेश किए जाने के तुरंत बाद रिकॉर्ड पर अपलोड किया जाए। कोर्ट ने कहा कि आगे ऐसी कोई कमी या चूक नहीं होनी चाहिए।
हाईकोर्ट ने कहा कि अब समय आ गया है कि पेपरलेस व्यवस्था को अदालत में लंबित सभी तरह के मामलों तक विस्तारित किया जाए। इसके लिए व्यवस्था से जुड़े हर व्यक्ति की स्पष्ट भूमिका और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है ताकि प्रत्येक दस्तावेज उसी दिन स्कैन होकर अपलोड हो सके।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक पेपरलेस कोर्ट का सपना केवल कागजों पर ही रहेगा।
पीठ ने रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि आदेश को प्रशासनिक स्तर पर चीफ जस्टिस के समक्ष रखा जाए, ताकि सभी प्रकार के मामलों के लिए व्यापक और संशोधित स्थायी आदेश जारी करने की मंजूरी ली जा सके।


