12 साल से लंबित भूमि अधिग्रहण मामले में महिला को आखिरी मौका, 25 छायादार पेड़ लगाने का आदेश

  • 12 साल से लंबित भूमि अधिग्रहण मामले में महिला को आखिरी मौका, 25 छायादार पेड़ लगाने का आदेश

    राजस्थान हाईकोर्ट ने 12 साल से अधिक समय से लंबित भूमि अधिग्रहण मामले में महिला को साक्ष्य पेश करने का आखिरी मौका दिया। हालांकि, यह अवसर उसे कुछ शर्तों के साथ दिया गया।

    जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने महिला को 15 दिनों के भीतर जूनियर एडवोकेट वेलफेयर फंड में 10 हजार रुपये जमा करने और सार्वजनिक स्थान पर 25 छायादार पेड़ लगाने का निर्देश दिया।

    हाईकोर्ट एक महिला की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें जयपुर मेट्रोपोलिटन-I के सीनियर सिविल जज द्वारा उसके साक्ष्य और जिरह का अवसर बंद करने के आदेश को चुनौती दी गई। महिला ने 2014 में भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 की धारा 3(बी) के तहत संदर्भ आवेदन दायर किया। उसका कहना था कि प्रतिवादियों द्वारा उसकी जमीन का अधिग्रहण किए जाने के बाद उसने यह आवेदन दायर किया।

    मामले में साक्ष्य दर्ज किए जाने के दौरान महिला 17 मई 2019 से 27 नवंबर 2019 तक ऑस्ट्रेलिया में थी। ट्रायल कोर्ट ने 17 सितंबर 2019 को उसका साक्ष्य पेश करने का अवसर बंद कर दिया। भारत लौटने के बाद उसने 2 जनवरी 2020 को आवेदन देकर साक्ष्य पेश करने का एक और अवसर मांगा, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने 27 जनवरी 2020 को उसकी अर्जी खारिज की। इसके बाद उसने हाईकोर्ट का रुख किया।

    हाईकोर्ट ने पाया कि 2014 में संदर्भ आवेदन दाखिल होने के बाद महिला को साक्ष्य पेश करने के लिए कई अवसर दिए गए, लेकिन वह हर बार साक्ष्य पेश करने में विफल रही। इसी वजह से ट्रायल कोर्ट ने 2019 में उसका साक्ष्य बंद कर दिया था।

    पीठ ने इस दलील को भी स्वीकार नहीं किया कि जिस समय उसका साक्ष्य बंद किया गया, उस समय वह विदेश में थी। कोर्ट ने कहा कि साक्ष्य बंद होने से पहले भी उसे कई अवसर दिए गए, जिनका उसने लाभ नहीं उठाया। हाईकोर्ट ने माना कि महिला ने मामले को आगे बढ़ाने में लापरवाही बरती है।

    हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले में महत्वपूर्ण कानूनी और तथ्यात्मक प्रश्न शामिल हैं जिनका गुण-दोष के आधार पर फैसला किया जाना जरूरी है। इसलिए न्यायहित में महिला को साक्ष्य पेश करने का आखिरी अवसर दिया जाना उचित है।

    इसके लिए हाईकोर्ट ने शर्त रखी कि महिला को 15 दिनों के भीतर राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर द्वारा संचालित 'जूनियर एडवोकेट्स वेलफेयर फंड फॉर परचेजिंग ऑफ लॉ बुक्स' में 10 हजार रुपये जमा करने होंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस राशि का इस्तेमाल पांच साल से कम वकालत का अनुभव रखने वाले युवा वकीलों को कानून की किताबें उपलब्ध कराने में किया जाएगा और किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं।

    इसके अलावा महिला को 15 दिनों के भीतर किसी सार्वजनिक क्षेत्र में 25 छायादार पेड़ लगाने होंगे। उसे पेड़ लगाए जाने की तस्वीरें अदालत में पेश करनी होंगी और यह शपथपत्र भी देना होगा कि वह पेड़ों की उचित देखभाल तब तक करेगी, जब तक वे पूरी तरह विकसित नहीं हो जाते। उसे कार्यवाही पूरी होने तक हर छह महीने में पेड़ों की तस्वीरें भी पेश करनी होंगी।

    कोर्ट ने कहा कि पेड़ लगाने का निर्देश व्यापक जनहित और सार्वजनिक भलाई को ध्यान में रखते हुए दिया गया। पेड़ शहर, आसपास रहने वाले लोगों और आने वाली पीढ़ियों के लिए लाभकारी होंगे।

    हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि महिला 15 दिनों के भीतर दोनों शर्तों का पालन करती है तो संदर्भ अदालत उसे साक्ष्य पेश करने का आखिरी और अंतिम अवसर देगी तथा इसके लिए कम अवधि की तारीख तय करेगी। लेकिन यदि वह निर्धारित समय में शर्तें पूरी नहीं करती या तय तारीख पर अपना साक्ष्य दर्ज नहीं कराती है, तो उसे आगे कोई समय नहीं दिया जाएगा।

    कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि संदर्भ आवेदन 12 साल से अधिक समय से लंबित है। हाईकोर्ट ने संदर्भ अदालत से अपेक्षा की कि वह अनावश्यक स्थगन की मांग स्वीकार किए बिना मामले का जल्द से जल्द निपटारा करने के लिए हर संभव प्रयास करे।

    इन निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा किया।

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