उपाय से वंचित नहीं छोड़ा जा सकता: ई-टेंडर अपील पर विवाद में राजस्थान हाईकोर्ट ने ऑफलाइन अपील की दी अनुमति
Amir Ahmad
20 Aug 2026 1:32 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने ई-टेंडर प्रक्रिया में अपील दाखिल करने को लेकर हुए विवाद में असफल बोलीदाता को राहत देते हुए उसे ऑफलाइन अपील दाखिल करने की अनुमति दी। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को अपने कानूनी उपाय से वंचित नहीं छोड़ा जा सकता। साथ ही, अपील पर अंतिम निर्णय होने तक निविदा प्रक्रिया पर रोक लगाई गई।
जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने याचिकाकर्ता को संबंधित विभाग के समक्ष 24 घंटे के भीतर अपील की प्रति ऑफलाइन जमा करने की अनुमति दी। अदालत ने विभाग को निर्देश दिया कि वह अपील पर शीघ्र निर्णय करे।
मामला एक नीलामी प्रक्रिया से जुड़ा था, जिसमें याचिकाकर्ता की तकनीकी बोली खारिज कर दी गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि उसने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के ई-टेंडर पोर्टल के माध्यम से निर्धारित समय के भीतर अपील दाखिल की थी। अपील जमा करने के बाद पोर्टल पर एक संदेश भी दिखाई दिया, जिसमें अपील के कारण सफलतापूर्वक जमा होने की पुष्टि की गई।
याचिकाकर्ता के अनुसार इसके बाद उसने स्क्रीन पर दिखाई दे रहे 'बंद करें' विकल्प को दबा दिया। उसका कहना था कि पोर्टल पर कहीं भी स्पष्ट रूप से यह निर्देश नहीं दिया गया कि अपील की प्रक्रिया पूरी करने के लिए 'बंद करें' विकल्प दबाना अनिवार्य है।
दूसरी ओर राज्य सरकार ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता की अपील विभाग को प्राप्त ही नहीं हुई, इसलिए उसे विधिवत दाखिल अपील नहीं माना जा सकता। राज्य की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता ने प्रक्रिया पूरी नहीं की और उसने बंद करें विकल्प को सही तरीके से नहीं दबाया। इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि अपील सफलतापूर्वक दाखिल हो गई।
राज्य ने यह भी कहा कि निर्धारित समय के भीतर अपील दाखिल नहीं होने के कारण विभाग के पास निविदा प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि 'बंद करें' विकल्प दबाया गया या नहीं, यह विवादित तथ्य है और अदालत इस स्तर पर इसका निर्णायक रूप से फैसला नहीं कर सकती।
हालांकि, जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने इस बात पर जोर दिया कि किसी व्यक्ति को बिना किसी कानूनी उपाय के नहीं छोड़ा जा सकता। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने विभाग की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपने अधिकार का इस्तेमाल करने का प्रयास किया था।
अदालत ने कहा,
“किसी व्यक्ति को अपने उपाय से वंचित नहीं किया जा सकता।”
अदालत ने यह भी माना कि यदि पोर्टल पर अपील के कारण सफलतापूर्वक जमा किए गए जैसा संदेश दिखाई देता है और कहीं स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया गया कि प्रक्रिया पूरी करने के लिए 'बंद करें' बटन दबाना जरूरी है तो सामान्य समझ वाला व्यक्ति यह मान सकता है कि उसकी अपील सफलतापूर्वक दाखिल हो गई।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को 24 घंटे के भीतर संबंधित विभाग के समक्ष अपील की प्रति ऑफलाइन जमा करने की अनुमति दी। विभाग को निर्देश दिया गया कि वह अपील पर शीघ्र निर्णय करे।
अदालत ने अपील पर अंतिम निर्णय होने तक संबंधित निविदा प्रक्रिया पर भी रोक लगाई।


