शादी के बाद बदले हालात: राजस्थान हाईकोर्ट ने दुष्कर्म और POCSO FIR रद्द की, कहा- विवाद का मूल आधार अब नहीं रहा

Amir Ahmad

15 Sept 2026 1:46 PM IST

  • शादी के बाद बदले हालात: राजस्थान हाईकोर्ट ने दुष्कर्म और POCSO FIR रद्द की, कहा- विवाद का मूल आधार अब नहीं रहा

    राजस्थान हाईकोर्ट ने पक्षकारों के बीच समझौते और बाद में उनके विवाह को ध्यान में रखते हुए दुष्कर्म और POCSO Act के तहत दर्ज FIR रद्द की।

    जस्टिस अनिल कुमार उपमन की पीठ ने कहा कि परिस्थितियों में आए बदलाव से स्पष्ट है कि विवाद का मूल आधार अब अस्तित्व में नहीं है और मामले में दोषसिद्धि की संभावना बेहद कम है।

    मामले में याचिकाकर्ता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और POCSO Act के तहत मामला दर्ज किया गया था। याचिकाकर्ता ने दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के आधार पर एफआईआर और उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी।

    याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि दोनों के बीच सहमति से संबंध थे लेकिन बाद में संबंधों में खटास आने के बाद FIR दर्ज कराई गई। बाद में परिस्थितियां बदल गईं और दोनों पक्षों ने अपने विवाद को आपसी सहमति से सुलझा लिया तथा विवाह कर लिया।

    दोनों पति-पत्नी के रूप में साथ रह रहे हैं और उनके बीच अब कोई विवाद नहीं है। पीड़िता ने भी याचिका में की गई मांग का विरोध नहीं किया।

    हाईकोर्ट ने कहा कि सामान्य तौर पर गंभीर और जघन्य अपराधों में केवल समझौते के आधार पर आपराधिक कार्यवाही खत्म नहीं की जा सकती। हालांकि, यह सिद्धांत पूर्ण नहीं है।

    दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत हाईकोर्ट को अपने अंतर्निहित अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए उपयुक्त मामलों में समझौते के आधार पर आपराधिक कार्यवाही रद्द करने का अधिकार है।

    कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में जहां विवाद मुख्य रूप से व्यक्तिगत प्रकृति का हो या अपराध गंभीर प्रावधान के अंतर्गत आता हो लेकिन सामाजिक दृष्टि से उसकी प्रकृति गंभीर न हो, और परिस्थितियों के कारण दोषसिद्धि की संभावना बेहद कम हो गई हो, वहां कार्यवाही जारी रखना केवल औपचारिकता बन सकता है। ऐसी स्थिति में न्यायालय अपने विवेक का इस्तेमाल कर कार्यवाही समाप्त कर सकता है।

    पीठ ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच मतभेद सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझ चुके हैं और उनका विवाह भी हो चुका है। ऐसे में आपराधिक कार्यवाही जारी रखने से कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होगा।

    हाईकोर्ट ने कहा,

    “परिस्थितियों में बदलाव इस बात का स्पष्ट संकेत है कि विवाद का मूल आधार अब अस्तित्व में नहीं है।”

    कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि FIR की सामग्री से ही पता चलता है कि एक समय दोनों पक्षों के बीच संबंध सौहार्दपूर्ण है। यह इस बात का संकेत है कि विवाद व्यक्तिगत प्रकृति का था और उसका व्यापक रूप से समाज को प्रभावित करने वाला स्वरूप नहीं है।

    पीठ ने इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के के. धंडापानी बनाम पुलिस निरीक्षक के माध्यम से राज्य मामले के फैसले का भी उल्लेख किया। उस मामले में भी समान परिस्थितियों को देखते हुए आपराधिक कार्यवाही रद्द की गई थी।

    इन परिस्थितियों और दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते तथा विवाह को ध्यान में रखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली और दुष्कर्म एवं POCSO Act के तहत दर्ज FIR रद्द की।

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