वक्फ संपत्तियों में जजों के सरकारी आवास, मंदिर और स्कूल दर्ज होने की खबर पर राजस्थान हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
Amir Ahmad
4 Aug 2026 3:27 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक समाचार रिपोर्ट में किए गए दावों का स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज करने का निर्देश दिया।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि जोधपुर में जजों के सरकारी आवास, स्कूल, कॉलेज, मंदिर तथा कई सार्वजनिक और निजी संपत्तियां आधिकारिक अभिलेखों में वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज हैं।
जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि राजस्व अभिलेखों में भिन्न स्थिति होने के बावजूद अनेक बड़ी संपत्तियों को वक्फ गजट में दर्ज कर उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों के रूप में अपलोड किया गया।
कोर्ट ने कहा कि मामले में शामिल भूमि का व्यापक दायरा, राजस्व अभिलेखों और वक्फ अभिलेखों के बीच स्पष्ट विरोधाभास तथा प्रभावित संपत्तियों में सार्वजनिक संस्थान, धार्मिक स्थल, आवासीय और व्यावसायिक परिसरों के साथ-साथ न्यायिक अधिकारियों के सरकारी आवास भी शामिल होना गंभीर चिंता का विषय है।
अदालत ने कहा कि इन परिस्थितियों में व्यापक जनहित को देखते हुए मामले की न्यायिक जांच आवश्यक है। इसलिए इस प्रकरण को जनहित याचिका के रूप में पंजीकृत करने का निर्देश दिया गया।
हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया शैक्षणिक संस्थानों, पूजा स्थलों, न्यायिक आवासों तथा बड़ी संख्या में आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों का वक्फ अभिलेखों में शामिल होना, जबकि राजस्व रिकॉर्ड कुछ और दर्शाते हैं सार्वजनिक अभिलेखों की विश्वसनीयता, वक्फ संपत्तियों के वैधानिक प्रबंधन तथा वक्फ गजट और उम्मीद पोर्टल पर प्रविष्टियां दर्ज करने की प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने विवादित संपत्तियों के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि इन संपत्तियों के संबंध में नामांतरण, हस्तांतरण, पट्टा, लाइसेंस, निर्माण, ध्वस्तीकरण अथवा ऐसा कोई भी कदम न उठाया जाए जिससे उनकी वर्तमान भौतिक या कानूनी स्थिति में बदलाव हो।
कोर्ट ने जोधपुर के जिला कलेक्टर को निर्देश दिया कि संबंधित राजस्व अभिलेखों को सुरक्षित रखा जाए तथा संबंधित खसरा नंबरों का स्थल पर जाकर भौतिक सत्यापन कराया जाए। सत्यापन के दौरान तस्वीरें और GPS विवरण भी दर्ज किए जाएं तथा संपत्तियों की प्रकृति और वर्तमान उपयोग से संबंधित तथ्यात्मक रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जाए।
साथ ही राजस्थान राज्य मुस्लिम वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को निर्देश दिया गया कि जिन संपत्तियों को वक्फ गजट और उम्मीद पोर्टल में दर्ज किया गया है उनसे संबंधित सभी मूल अभिलेख अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं।
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त 2026 को निर्धारित की है।


