वकीलों के साथ नौकरों की तरह नहीं किया जा सकता व्यवहार, मनमाने तरीके से हटाना गलत: राजस्थान हाईकोर्ट
Amir Ahmad
31 March 2026 4:23 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि वकीलों की अपनी गरिमा होती है और उन्हें नौकरों की तरह नहीं माना जा सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि वकीलों की नियुक्ति और हटाने की प्रक्रिया तय शर्तों और नियमों के अनुसार ही होनी चाहिए न कि मनमाने ढंग से।
जस्टिस गणेश राम मीणा की पीठ ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) द्वारा सहायक वकीलों को हटाने के आदेशों को रद्द करते हुए कहा कि प्राधिकरण ने खुद बनाए गए नियमों और शर्तों की अनदेखी की है।
अदालत ने कहा,
“वकीलों की गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता। उन्हें मनमर्जी से नियुक्त या हटाया नहीं जा सकता। यह प्रक्रिया उचित नियमों और शर्तों के अनुसार ही होनी चाहिए।”
मामला उन सहायक वकीलों से जुड़ा है, जिन्हें JDA ने अपने कार्यालय और पैनल वकीलों के बीच समन्वय के लिए नियुक्त किया था। इनकी नियुक्ति इसलिए की गई थी, क्योंकि प्राधिकरण में विधि अधिकारियों की कमी थी।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनकी सेवाएं बिना किसी ठोस कारण के समाप्त कर दी गईं, जबकि उनकी कार्यप्रदर्शन रिपोर्ट संतोषजनक थी।
हाईकोर्ट ने पाया कि नियुक्ति से जुड़े आदेशों में स्पष्ट था कि सहायक वकीलों को केवल तभी हटाया जा सकता है, जब उनका कार्य संतोषजनक न हो। लेकिन इस मामले में बिना किसी उचित कारण के और केवल निर्देशों के आधार पर उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं।
अदालत ने कहा कि राज्य और उसकी संस्थाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से काम करना चाहिए और मनमाने निर्णयों से बचना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि JDA सहायक वकीलों की नियुक्ति और हटाने के लिए स्पष्ट नीति और दिशा-निर्देश तैयार करे, जिसमें पात्रता, कार्यकाल और प्रक्रिया तय हो।
साथ ही अदालत ने कहा कि नई नीति में महिलाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़े वर्ग और कमजोर वर्गों के वकीलों को भी उचित प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए, क्योंकि उनका पारिश्रमिक सार्वजनिक धन से दिया जाता है।
अदालत ने यह भी आदेश दिया कि जिन याचिकाकर्ताओं की याचिकाएं स्वीकार की गई हैं, उन्हें तब तक कार्य करने दिया जाए, जब तक उनका कार्य संतोषजनक है या नई नीति लागू नहीं हो जाती।
इसी के साथ हाईकोर्ट ने JDA के सभी संबंधित आदेशों को रद्द किया और याचिकाएं स्वीकार की।

