जोधपुर में मांस दुकानों की जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर दखल से हाईकोर्ट का इनकार

Amir Ahmad

27 July 2026 5:20 PM IST

  • जोधपुर में मांस दुकानों की जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर दखल से हाईकोर्ट का इनकार

    राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर में कथित अवैध पशु वध और बिना लाइसेंस संचालित मांस दुकानों की जांच की मांग वाली जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए कहा कि शहर में मांस व्यापार को नियंत्रित करने के लिए पहले से ही कानूनी व्यवस्था मौजूद है। ऐसे में अदालत को नियामकीय व्यवस्था के सूक्ष्म पहलुओं में हस्तक्षेप करने या विस्तृत जांच के आदेश देने की आवश्यकता नहीं है।

    डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि यदि कोई दुकान आवश्यक लाइसेंस के बिना संचालित होती पाई जाती है तो संबंधित व्यक्ति को लाइसेंस लेने की आवश्यकता से अवगत कराया जाए और उसके आवेदन पर कानून के अनुसार निर्णय लिया जाए।

    जनहित याचिका में मांग की गई थी कि जोधपुर में कानून के विपरीत संचालित मांस दुकानों का विस्तृत सर्वे कराया जाए और अवैध रूप से कारोबार करने वालों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाए।

    याचिका में यह भी आग्रह किया गया था कि नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धाराओं 269 और 340 के तहत बनाए गए उपनियमों में संशोधन कर धार्मिक स्थलों, शिक्षण संस्थानों, सार्वजनिक उद्यानों और अन्य सार्वजनिक उपयोग के स्थानों के आसपास मांस दुकानों की स्थापना पर पर्याप्त प्रतिबंध लगाए जाएं। साथ ही, ऐसे स्थानों के निकट पहले से संचालित दुकानों को बंद करने के निर्देश भी दिए जाएं।

    याचिकाकर्ता का कहना था कि मांस दुकानों के नियमन के दौरान उनके स्थान का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए, ताकि मांस का सेवन नहीं करने वाले लोगों की धार्मिक और सामाजिक भावनाओं का सम्मान हो सके।

    वहीं, नगर निगम की ओर से अदालत को बताया गया कि जोधपुर में मांस दुकानों का संचालन वर्ष 1991 के उपनियमों तथा वर्ष 2012 में किए गए संशोधनों के तहत नियंत्रित होता है। इन्हीं नियमों के अनुसार लाइसेंस जारी किए जाते हैं।

    प्राधिकरणों ने हलफनामे में यह भी बताया कि शहर में वधशालाएं चिन्हित हैं और वर्तमान में 351 लाइसेंसधारी मांस विक्रेता निर्धारित नियामकीय व्यवस्था के तहत कार्य कर रहे हैं।

    सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि इस जनहित याचिका में वधशालाओं या मांस व्यापार के संचालन की विस्तृत जांच कराने की आवश्यकता नहीं है।

    अदालत ने कहा,

    "इस जनहित याचिका में अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए नियामकीय व्यवस्था के इतने सूक्ष्म पहलुओं में हस्तक्षेप करने के लिए हम सहमत नहीं हैं। प्रतिवादी प्राधिकरणों की ओर से दाखिल अतिरिक्त हलफनामा यह दर्शाता है कि जोधपुर शहर में मांस व्यापार के लिए पर्याप्त नियामकीय ढांचा पहले से मौजूद है।"

    इन्हीं टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने माना कि मामले में किसी अतिरिक्त न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है और जनहित याचिका का निस्तारण किया।

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