राजस्थान हाईकोर्ट में वकीलों की हड़ताल, एक्टिंग चीफ जस्टिस एसपी शर्मा पर अधिकारों के दुरुपयोग का आरोप

Amir Ahmad

31 Aug 2026 8:03 PM IST

  • राजस्थान हाईकोर्ट में वकीलों की हड़ताल, एक्टिंग चीफ जस्टिस एसपी शर्मा पर अधिकारों के दुरुपयोग का आरोप

    राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर और जोधपुर पीठ में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों ने कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ हड़ताल शुरू की। वकीलों ने उन पर प्रशासनिक अधिकारों के कथित दुरुपयोग और मामलों की सूची प्रभावित करने के आरोप लगाएं।

    सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में हाईकोर्ट के गलियारों में बड़ी संख्या में वकील बैठे और नारे लगाते दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह विरोध कार्यवाहक चीफ जस्टिस के खिलाफ लगाए गए हालिया आरोपों के बाद शुरू हुआ।

    मामला तब और गंभीर हो गया, जब सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत को पत्र लिखकर एक्टिंग चीफ जस्टिस एसपी शर्मा पर प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग और मामलों की सूची में कथित हेरफेर के आरोप लगाए। जस्टिस मेहता ने राजस्थान हाईकोर्ट में किसी अन्य हाईकोर्ट से चीफ जस्टिस नियुक्त किए जाने का भी आग्रह किया।

    अपने पत्र में जस्टिस मेहता ने एक्टिंग चीफ जस्टिस शर्मा के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके पास उनके न्यायिक कामकाज को लेकर कई शिकायतें आई हैं, जो प्रथम दृष्टया उनकी सत्यनिष्ठा को लेकर संदेह पैदा करती हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक्टिंग चीफ जस्टिस के तौर पर जस्टिस शर्मा कई मौकों पर संस्था के प्रमुख के पद के अनुरूप आचरण नहीं कर रहे हैं।

    जस्टिस मेहता ने अपने पत्रों में यह भी बताया कि उनके राजस्थान दौरे के दौरान कई जजों ने उनसे संपर्क किया था। उनके अनुसार, इन जजों ने आरोप लगाया कि एक्टिंग चीफ जस्टिस अपने साथी जजों को कार्रवाई की धमकी देते हैं, जिसमें तबादले की धमकी भी शामिल है। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि जस्टिस शर्मा अपने कथित तौर पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया से करीबी संबंधों का हवाला देते हैं।

    जस्टिस मेहता ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि जस्टिस शर्मा करीब 10 महीने से एक्टिंग चीफ जस्टिस के पद पर बने हुए हैं। उन्होंने मई 2026 में जस्टिस शर्मा की राजस्थान हाईकोर्ट में वापसी पर भी सवाल उठाया।

    जस्टिस मेहता ने मार्च 2023 की कॉलेजियम की एक सिफारिश का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय उनकी राजस्थान हाईकोर्ट में वापसी की मांग स्वीकार नहीं की गई और उन्हें पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट स्थानांतरित करने का प्रस्ताव दिया गया। ऐसे में बाद में जस्टिस शर्मा को राजस्थान हाईकोर्ट लौटने की अनुमति दिए जाने को लेकर उन्होंने सवाल उठाया।

    हालांकि, चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एक प्रेस बयान में स्पष्ट किया कि किसी मौजूदा जज के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच स्थापित प्रक्रिया के तहत ही की जाएगी।

    चीफ जस्टिस ने कहा कि पत्र की सामग्री का फैसला सार्वजनिक मंच पर नहीं किया जा सकता। जस्टिस शर्मा को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता। मीडिया रिपोर्टों के जरिए सार्वजनिक हुए जस्टिस मेहता के आरोपों को अपने आप में जस्टिस शर्मा के खिलाफ कोई निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

    चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि पूरे मामले की जांच उचित स्तर पर की जानी आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस के संबंध में कोई भी कार्रवाई सक्षम प्राधिकारी द्वारा जस्टिस मेहता की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और जस्टिस शर्मा के जवाब की जांच के बाद ही की जाएगी।

    इस बीच, दोनों पीठों के वकीलों की हड़ताल ने राजस्थान हाईकोर्ट में न्यायिक कामकाज को प्रभावित किया। वकीलों के विरोध के बीच अब निगाहें इस बात पर हैं कि एक्टिंग चीफ जस्टिस के खिलाफ लगाए गए आरोपों की संस्थागत स्तर पर जांच किस तरह आगे बढ़ती है।


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