पर्याप्त और समय पर मेडिकल सुविधाएं जीवन के अधिकार से जुड़ीं; स्वास्थ्य सुधारों के ठोस परिणाम दिखने चाहिए: राजस्थान हाईकोर्ट

  • पर्याप्त और समय पर मेडिकल सुविधाएं जीवन के अधिकार से जुड़ीं; स्वास्थ्य सुधारों के ठोस परिणाम दिखने चाहिए: राजस्थान हाईकोर्ट

    राजस्थान हाईकोर्ट ने मेडिकल सुविधाओं की कमी, आवश्यक बुनियादी ढांचे के अभाव और राज्य की ओर से समय पर मेडिकल सहायता सुनिश्चित करने में विफलता से जुड़े मुद्दों पर दायर जनहित याचिका (PIL) का निस्तारण किया।

    अदालत ने इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे और उसमें बताए गए उठाए गए तथा प्रस्तावित कदमों पर विचार किया।

    चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने कहा कि राज्य से अपेक्षा की जाती है कि वह पहले से उठाए गए कदमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए गंभीर प्रयास करे और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद कमियों को दूर करे।

    अदालत ने कहा,

    “मामले के महत्व और इस तथ्य को देखते हुए कि पर्याप्त, सुलभ और समय पर चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत दिए गए जीवन के मौलिक अधिकार से अभिन्न रूप से जुड़ी है... यह भी अपेक्षा की जाती है कि प्रतिवादी राज्य यह सुनिश्चित करने के लिए सतर्क रहेगा कि उठाए गए कदम केवल प्रशासनिक आश्वासनों तक सीमित न रहें, बल्कि राजस्थान राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के वितरण में ठोस और प्रभावी सुधार के रूप में सामने आएं।”

    राजस्थान में मेडिकल और स्वास्थ्य सुविधाओं की लगातार बनी हुई व्यवस्थागत कमियों को उठाते हुए जनहित याचिका में कहा गया कि कई मामलों में मरीजों की मौत उनकी बीमारी या चोट की गंभीरता के कारण नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण समय पर उचित चिकित्सा सहायता उपलब्ध नहीं होने के कारण हुई।

    याचिका में यह भी कहा गया कि वर्ष 2024 में स्वास्थ्य सेवाओं की कमियों को लेकर राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपे जाने के बावजूद पिछले दो वर्षों में कोई प्रभावी सुधारात्मक कदम दिखाई नहीं दिया।

    याचिकाकर्ता के अनुसार, यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि लगातार जारी निष्क्रियता थी। यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण था, क्योंकि इसका सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार पर असर पड़ता है।

    इसके विपरीत, राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि पहले दिए गए निर्देशों के अनुसार उसने हलफनामा दाखिल किया, जिसमें संबंधित कमियों को दूर करने के लिए उठाए गए कदमों और प्रस्तावित उपायों का विवरण दिया गया।

    राज्य सरकार ने बताया कि एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में आग लगने की घटना के बाद कई कदम प्रस्तावित किए गए। इनमें वर्ष 2026-27 के लिए मरम्मत और रखरखाव के उद्देश्य से 10 करोड़ रुपये का आवंटन भी शामिल है।

    सरकार ने यह भी बताया कि राज्यभर में मेडिकल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई उपाय अपनाए गए। इनमें विशेष रूप से दवाओं और शल्य चिकित्सा संबंधी सामग्री की खरीद, गुणवत्ता नियंत्रण, भंडारण और वितरण पर ध्यान दिया गया।

    राज्य की ओर से कहा गया,

    “राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे की कमियों को दूर करने, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, गुणवत्तापूर्ण दवाओं की खरीद सुनिश्चित करने और निर्धारित जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन मानकों का अनुपालन बनाए रखने के लिए विभिन्न कदम उठाए।”

    दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे को देखते हुए फिलहाल किसी और निर्देश की आवश्यकता नहीं है।

    इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने जनहित याचिका का निस्तारण किया।

    अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

    Next Story