कस्टडी में मौत पर मुआवजा योजना 3 महीने में अधिसूचित करे राज्य सरकार: राजस्थान हाईकोर्ट, जेलों में CCTV और सुरक्षा सुधारने के निर्देश
Amir Ahmad
29 Oct 2026 3:32 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को राजस्थान कस्टोडियल डेथ रिलीफ स्कीम, 2025 को तीन महीने के भीतर अंतिम रूप देने, मंजूरी देने और औपचारिक रूप से अधिसूचित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने राज्य की जेलों में कैदियों के अधिकारों, सुरक्षा, बुनियादी सुविधाओं और रहने की परिस्थितियों में सुधार के लिए भी कई निर्देश जारी किए।
चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने कैदियों के अधिकारों, कल्याण और गरिमा के साथ-साथ जेलों के बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और रहने की स्थितियों से जुड़ी जनहित याचिकाओं का निपटारा करते हुए ये निर्देश दिए।
हाईकोर्ट ने जेलों की स्थिति की निगरानी, न्यायिक निर्देशों के क्रियान्वयन और आदेशों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए एक स्थायी राज्य स्तरीय निगरानी समिति का गठन भी किया। संबंधित जिले के जिला जज इस समिति की अध्यक्षता करेंगे।
कोर्ट ने वर्ष 2012 से 2026 के दौरान जेलों की स्थिति से जुड़े मामलों में स्वतः संज्ञान लिया था। शुरुआत में अखबारों में प्रकाशित जेलों की सुरक्षा में चूक से संबंधित खबरों के आधार पर कार्यवाही शुरू हुई। बाद में कई कैदियों की ओर से जेलों की परिस्थितियों और उनके अधिकारों को लेकर की गई शिकायतों को भी इसमें शामिल किया गया।
हालिया निर्देश राज्य सरकार की ओर से दाखिल स्थिति रिपोर्टों की समीक्षा के बाद जारी किए गए। इनमें अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में 29 जून 2026 को विचाराधीन कैदी जगन गुर्जर की मौत का मामला भी शामिल था। राज्य की रिपोर्ट के अनुसार, जिस सेल में यह घटना हुई, वहां लगा सीसीटीवी कैमरा तकनीकी खराबी के कारण काम नहीं कर रहा था।
हाईकोर्ट ने कहा कि जेल सुधारों के लिए वर्षों से किए गए प्रयासों के बावजूद निरंतर निगरानी आवश्यक है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि वर्ष 2008 से अब तक किए गए व्यापक प्रयासों से संस्थागत सुधार हुए हैं, जेल नियमों को अपडेट किया गया और बुनियादी ढांचे में बड़े स्तर पर सुधार किए गए। हालांकि, अजमेर की 29 जून 2026 की दुर्भाग्यपूर्ण घटना दर्शाती है कि निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए लगातार सतर्कता और पर्याप्त तकनीकी सहायता जरूरी है। केवल समय-समय पर अनुपालन करना पर्याप्त नहीं है।
हाईकोर्ट ने राजस्थान के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के निदेशक और राजकॉम्प इन्फो सर्विसेज लिमिटेड (RISL) को जेलों में CCTV कैमरों के रखरखाव से संबंधित लंबित शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने प्रस्तावित सभी कैमरों की स्थापना के लिए तीन महीने का समय दिया। इसमें बीकानेर जेल में 275 और जयपुर जेल में 60 कैमरे लगाए जाना शामिल है। साथ ही, खराब कैमरों की मरम्मत करने और पर्याप्त स्टोरेज तथा बैकअप सिस्टम को कार्यशील बनाए रखने का निर्देश दिया गया।
जेल विभाग को सभी जेलों में मोबाइल फोन की नियमित, गहन और अचानक तलाशी के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने को कहा गया है। तलाशी के दौरान बरामद मोबाइल फोन का जेल-वार रिकॉर्ड भी रखा जाएगा।
राज्य सरकार को जेलों में कैदियों की मौजूदा संख्या के आधार पर चालानी गार्डों की आवश्यकता का आकलन करने और तीन महीने के भीतर समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया। इसके अलावा, कैदियों को दिए जाने वाले पारिश्रमिक को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप सुनिश्चित करने को कहा गया।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सभी महिला जेलों में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनों की उपलब्धता और उनके सुचारु संचालन को सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया। पति-पत्नी या माता-पिता और बच्चों जैसे करीबी रिश्तेदारों के बीच समय-समय पर मुलाकात की अनुमति देने वाली नीति को दो महीने के भीतर अंतिम रूप देने का आदेश दिया गया।
राज्य स्तरीय निगरानी समिति को हर तीन महीने में बैठक कर इस फैसले और हाईकोर्ट के पहले के आदेशों के अनुपालन की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया।

