पत्रकार जनता की आंख-कान, अतिक्रमण की जानकारी कलेक्टर को दे सकते हैं: राजस्थान हाईकोर्ट

Amir Ahmad

1 Sept 2026 3:01 PM IST

  • पत्रकार जनता की आंख-कान, अतिक्रमण की जानकारी कलेक्टर को दे सकते हैं: राजस्थान हाईकोर्ट

    राजस्थान हाईकोर्ट ने नदियों, झीलों और जलस्रोतों के संरक्षण से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान कहा कि मीडिया और पत्रकार जनता की आंख और कान हैं। वे जलस्रोतों के आसपास होने वाले अतिक्रमण की जानकारी जिला कलेक्टर को दे सकते हैं और अतिक्रमण रोकने में अपनी भूमिका निभा सकते हैं।

    एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने जयपुर जिला कलेक्टर की ओर से दाखिल हलफनामे का संज्ञान लिया। हलफनामे में रामगढ़ बांध की ओर पानी के बहाव वाले क्षेत्र में आने वाली नदियों और छोटे नालों के जलग्रहण क्षेत्र में मौजूद अतिक्रमण की सूची दी गई।

    कोर्ट ने पाया कि विशेष रूप से आंधी, जमवारामगढ़, आमेर, शाहपुरा और विराटनगर तहसीलों में बड़ी संख्या में अतिक्रमण हैं जिन्हें हटाया जाना जरूरी है। अदालत ने कहा कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले लोग अतिक्रमणकारी हैं।

    अतिक्रमणकारियों की संख्या बहुत अधिक होने के कारण अदालत ने माना कि प्रत्येक व्यक्ति को अलग-अलग नोटिस भेजने में काफी समय लगेगा। इसलिए कानूनी रूप से नोटिस देने और अतिक्रमण हटाने के लिए 15 दिन का समय देने की आवश्यकता पूरी करने के उद्देश्य से कोर्ट ने अतिक्रमणकारियों की सूची राज्य में सबसे अधिक प्रसार वाले दो समाचार पत्रों, दैनिक भास्कर और राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित करने का निर्देश दिया।

    अदालत ने कहा कि इससे अतिक्रमणकारियों के पास यह कहने का बहाना नहीं रहेगा कि उन्हें सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया या उन्हें कार्रवाई की जानकारी नहीं थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समाचार पत्रों में नोटिस प्रकाशित होने के बावजूद यदि अतिक्रमण नहीं हटाया जाता है तो राज्य सरकार और उसके अधिकारी तत्काल कार्रवाई कर अतिक्रमण हटाएंगे। अतिक्रमण हटाने में होने वाला पूरा खर्च संबंधित अतिक्रमणकारियों से वसूला जाएगा।

    हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यदि बड़े पैमाने पर अतिक्रमण सामने आता है या कार्रवाई का विरोध किया जाता है तो राज्य सरकार आवश्यक पुलिस सहायता ले सकती है और जरूरत पड़ने पर आपराधिक मामले भी दर्ज कर सकती है।

    अदालत ने जिला कलेक्टर को निर्देश दिया कि यदि किसी व्यक्ति या संस्था की ओर से अतिक्रमण की जानकारी दी जाती है तो वह उसकी जांच कराए और जानकारी सही पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई करे।

    इसी संदर्भ में कोर्ट ने कहा,

    “मीडिया और पत्रकारों को भी जनता की आंख और कान माना जाता है। उनकी भी भूमिका है कि अतिक्रमण न होने पाए। जहां भी उन्हें ऐसा अतिक्रमण दिखाई दे वे इसकी जानकारी जयपुर कलेक्टर को दे सकते हैं।”

    मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को होगी।

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