उदयपुर की झीलों पर अतिक्रमण और प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त, स्वतः संज्ञान लेकर मांगी विस्तृत रिपोर्ट

Amir Ahmad

10 Jun 2026 3:28 PM IST

  • उदयपुर की झीलों पर अतिक्रमण और प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त, स्वतः संज्ञान लेकर मांगी विस्तृत रिपोर्ट

    राजस्थान हाईकोर्ट ने उदयपुर की झीलों, नहरों और अन्य जलाशयों पर बढ़ते अतिक्रमण, प्रदूषण तथा अनियंत्रित विकास गतिविधियों से जुड़े मामलों का स्वतः संज्ञान लिया।

    अदालत ने कहा कि उदयपुर की झीलें केवल शहर की पहचान ही नहीं हैं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और जल सुरक्षा के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

    डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस रेखा बोराना की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए उदयपुर की प्राकृतिक सुंदरता का उल्लेख किया।

    अदालत ने कवि एवं विद्वान श्री जयकृष्ण चौधरी 'हबीब' की प्रसिद्ध पंक्तियों का भी हवाला दिया, जिनमें उदयपुर को स्वर्ग जैसी सुंदरता वाला नगर बताया गया।

    अदालत ने विभिन्न समाचार रिपोर्टों का संज्ञान लिया, जिनमें झील क्षेत्रों पर कथित अतिक्रमण, झीलों की सीमाओं को लेकर विवाद, जलाशयों के क्षरण, नहरों की खराब स्थिति, पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों के निकट विकास कार्यों तथा शहरी जल संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन से जुड़ी चिंताएं सामने आई हैं।

    खंडपीठ ने कहा कि उदयपुर की झीलों और जलाशयों का यह नेटवर्क भूजल पुनर्भरण, जल सुरक्षा, जैव विविधता संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण, जलवायु अनुकूलन और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।

    अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 21, अनुच्छेद 48(क) और अनुच्छेद 51(क)(ग) के साथ-साथ सार्वजनिक न्यास सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण की अनुमति नहीं दी जा सकती, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां जल संसाधनों पर पहले से दबाव है।

    अदालत ने कहा,

    "विकास गतिविधियां आर्थिक वृद्धि और पर्यटन को बढ़ावा दे सकती हैं। इनके साथ पर्यावरण संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन, झीलों की वहन क्षमता और दीर्घकालिक स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।"

    जनहित को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों और अधिकारियों को विस्तृत समेकित रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

    उक्त रिपोर्ट में उदयपुर की प्रमुख झीलों, जलाशयों और नहरों का विवरण, उनकी वर्तमान स्थिति, जल गुणवत्ता, सीमांकन, अतिक्रमण की स्थिति, अवैध निर्माण, सीवेज और अन्य अपशिष्ट जल के निस्तारण, पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों तथा पिछले पांच वर्षों में संरक्षण और रखरखाव पर खर्च की गई राशि की जानकारी शामिल करने को कहा गया।

    इसके अलावा अदालत ने अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक कार्ययोजना भी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

    हाईकोर्ट ने पिछोला झील, फतेहसागर झील, स्वरूप सागर झील, रंग सागर झील, रूप सागर तालाब, दूध तलाई, गोवर्धन सागर झील, बड़ी झील (जियान सागर), उदय सागर झील, मदार झील, बड़ा मदार झील, छोटा मदार झील और कुम्हारिया तालाब सहित अन्य परस्पर जुड़े जलाशयों का निरीक्षण करने का आदेश दिया। निरीक्षण के दौरान उनकी पारिस्थितिक स्थिति, जल गुणवत्ता, कैचमेंट क्षेत्र की स्थिति, अतिक्रमण और संरक्षण संबंधी आवश्यकताओं का आकलन किया जाएगा।

    अदालत ने राज्य सरकार को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि किसी भी झील या जलाशय में बिना उपचारित सीवेज या अन्य अपशिष्ट जल का प्रवाह न हो। साथ ही सक्षम प्राधिकारियों द्वारा चिन्हित प्रमुख झीलों और जलाशयों के वर्तमान स्वरूप और क्षेत्रफल को अगली सुनवाई तक यथावत बनाए रखा जाए, सिवाय उन मामलों के जहां कानून के अनुसार संरक्षण या पुनर्स्थापन का कार्य किया जा रहा हो।

    मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई।

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