निर्धारित समय के बाद शराब बिक्री पर सख्त हुआ राजस्थान हाईकोर्ट, औचक निरीक्षण के आदेश

Amir Ahmad

2 Jun 2026 5:45 PM IST

  • निर्धारित समय के बाद शराब बिक्री पर सख्त हुआ राजस्थान हाईकोर्ट, औचक निरीक्षण के आदेश

    राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर में निर्धारित समय सीमा के बाद भी खुलेआम शराब बिक्री के मामलों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनस्वास्थ्य, सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया। अदालत ने कहा कि नियमों की अनदेखी कर देर रात तक शराब की बिक्री संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 47 के उद्देश्यों को प्रभावित करती है तथा नागरिकों के सुरक्षित और गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार पर प्रतिकूल असर डालती है।

    डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और डॉ. जस्टिस नूपुर भाटी की खंडपीठ ने इस मामले में अंतरिम आदेश जारी करते हुए पुलिस और आबकारी विभाग को विशेष प्रवर्तन दल गठित कर औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए।

    मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने एक स्थानीय समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट का संज्ञान लिया, जिसमें किए गए स्टिंग अभियान में यह सामने आया कि निर्धारित समय समाप्त होने के बाद भी कई शराब दुकानें गुप्त तरीकों से बिक्री कर रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार कहीं आधे शटर खोलकर तो कहीं विशेष खिड़कियों के माध्यम से ग्राहकों को शराब उपलब्ध कराई जा रही थी। अदालत ने इसे आबकारी कानूनों के अनुपालन में प्रशासनिक विफलता का संकेत माना।

    खंडपीठ ने कहा कि शराब का व्यापार कोई मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि राज्य द्वारा प्रदान किया गया एक विशेषाधिकार है, जिस पर कड़ा नियामकीय नियंत्रण आवश्यक है। राज्य का दायित्व है कि वह लाइसेंस की शर्तों, विशेषकर दुकान बंद करने के निर्धारित समय का सख्ती से पालन सुनिश्चित करे।

    अदालत ने अपने आदेश में कहा,

    “जब कार्यपालिका की उदासीनता या मिलीभगत कानून के शासन और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के लिए खतरा बन जाए तब न्यायालय का हस्तक्षेप आवश्यक हो जाता है।”

    हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, पुलिस और आबकारी विभाग सहित संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी। अदालत ने पूछा है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले लाइसेंसधारकों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई, अवैध बिक्री रोकने के लिए कौन से कदम उठाए गए और रात्रिकालीन निगरानी की वर्तमान व्यवस्था क्या है।

    अंतरिम निर्देशों के तहत पुलिस आयुक्त और जिला आबकारी अधिकारी को विशेष प्रवर्तन दल गठित करने को कहा गया, जो अचानक निरीक्षण करेंगे। इन निरीक्षणों की भौगोलिक स्थिति दर्ज की जाएगी और पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

    अदालत ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वह तकनीकी उपायों की व्यवहार्यता पर विचार करे। इनमें रात्रि दृष्टि क्षमता वाले निगरानी कैमरे, डिजिटल बिलिंग प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक बिक्री बिंदु प्रणाली तथा समय-चिह्न आधारित दुकान बंदी सत्यापन व्यवस्था शामिल हैं।

    इसके अलावा हाईकोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों, धार्मिक स्थलों और आवासीय क्षेत्रों के निकट संचालित शराब दुकानों का भी विवरण तलब किया।

    मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई, 2026 को होगी, जब राज्य सरकार और संबंधित विभागों द्वारा अदालत के समक्ष अपनी रिपोर्ट पेश की जाएगी। अदालत ने संकेत दिया है कि जनहित और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े इस मुद्दे पर वह आगे भी कड़ी निगरानी बनाए रखेगी।

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