लोकतांत्रिक सीमाएं लांघने पर ही पुलिस खर्च की वसूली: राजस्थान हाइकोर्ट
Amir Ahmad
20 Feb 2026 12:40 PM IST

राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक ढंग से किए गए विरोध-प्रदर्शन पर सामान्यतः पुलिस बल की तैनाती का खर्च नहीं वसूला जा सकता लेकिन यदि प्रदर्शनकारी लोकतांत्रिक सीमाओं का उल्लंघन करते हैं तो अतिरिक्त खर्च की वसूली की जा सकती है।
यह टिप्पणी जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने उस मामले की सुनवाई के दौरान की जिसमें एक प्रदर्शन के दौरान एक याचिकाकर्ता के पानी की ऊँची टंकी पर चढ़ जाने के कारण अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा था और उसके खर्च की वसूली का प्रश्न उठा था।
अदालत ने स्पष्ट कहा,
“किसी कथित नागरिक अन्याय या सरकार के किसी निर्णय के विरुद्ध शांतिपूर्ण और विधिसम्मत तरीके से युक्तिसंगत प्रतिबंधों के अधीन किया गया आंदोलन या विरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था का अभिन्न अंग है और ऐसे मामलों में सामान्यतः प्रदर्शनकारियों पर खर्च की वसूली नहीं थोपी जानी चाहिए।”
हालांकि पीठ ने यह भी जोड़ा,
“यदि कोई कृत्य लोकतांत्रिक मर्यादाओं का अतिक्रमण करता है जैसे कि सार्वजनिक व्यवस्था या सुरक्षा के लिए खतरे की आशंका के साथ पानी की ऊँची टंकी पर चढ़ जाना तो कानून-व्यवस्था बनाए रखने में हुए अतिरिक्त खर्च की वसूली विधिसम्मत रूप से की जा सकती है।”
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए याचिका खारिज की। साथ ही अदालत ने संबंधित पुलिस अधीक्षक को यह स्वतंत्रता दी कि वे निष्पक्ष रूप से यह पुनर्मूल्यांकन करें कि प्रदर्शन का कौन-सा हिस्सा विधिसम्मत और शांतिपूर्ण था और किस सीमा तक लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन हुआ।
अदालत ने निर्देश दिया कि वसूली केवल उन्हीं कृत्यों तक सीमित रहे जो वैध लोकतांत्रिक विरोध की सीमा से बाहर थे न कि शांतिपूर्ण आंदोलन पर।

