वकील की गैरहाजिरी में अधूरी क्रॉस एग्जामिनेशन नहीं चलेगी: राजस्थान हाईकोर्ट ने गवाह को दोबारा बुलाने की दी अनुमति
Amir Ahmad
13 April 2026 12:35 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि आरोपी को प्रभावी जिरह (क्रॉस-एग्जामिनेशन) के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता खासकर तब जब उसके वकील की अनुपस्थिति के कारण जिरह ठीक से नहीं हो पाई हो।
जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने एक हत्या के आरोपी को राहत देते हुए ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें प्रत्यक्षदर्शी गवाह को दोबारा बुलाने की मांग खारिज की गई थी। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को अत्यधिक तकनीकी करार दिया।
अदालत ने कहा,
“किसी सामान्य व्यक्ति से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह एक प्रशिक्षित वकील की तरह गवाह से क्रॉस एग्जामिनेशन कर सके। वकील की अनुपस्थिति के कारण यदि बचाव का अधिकार प्रभावित होता है तो इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”
मामले में जिस दिन प्रत्यक्षदर्शी गवाह से क्रॉस एग्जामिनेशन होनी थी उस दिन आरोपी का वकील मौजूद नहीं था। ऐसे में आरोपी ने स्वयं गवाह से सवाल किए लेकिन यह क्रॉस एग्जामिनेशन प्रभावी नहीं मानी गई। बाद में गवाह को दोबारा बुलाने के लिए आवेदन दिया गया, जिसे ट्रायल कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि प्रभावी क्रॉस एग्जामिनेशन का अधिकार केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि निष्पक्ष सुनवाई का मूल आधार है। यदि इस अधिकार को सीमित कर दिया जाए तो न्याय की प्रक्रिया प्रभावित होती है।
अदालत ने यह भी कहा कि भले ही गवाह को दोबारा बुलाने से कुछ असुविधा हो लेकिन न्याय का पलड़ा निष्पक्ष सुनवाई के पक्ष में झुकना चाहिए। गवाह की असुविधा को संतुलित करने के लिए उचित खर्च दिया जा सकता है।
अंततः हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह गवाह को दोबारा बुलाए। साथ ही आरोपी को 5000 रुपये जमा करने का निर्देश दिया गया, जो गवाह को मुआवजे के रूप में दिया जाएगा।

