बिना सभी प्रयास किए किसी को 'फरार' घोषित नहीं किया जा सकता: हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की जल्दबाजी पर जताई आपत्ति
Amir Ahmad
15 April 2026 1:06 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी आरोपी को फरार घोषित करने से पहले उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सभी उचित और प्रभावी कदम उठाना जरूरी है। बिना ऐसा किए सीधे कठोर कार्रवाई करना कानून के अनुरूप नहीं है।
जस्टिस फरजंद अली की सिंगल बेंच ने यह फैसला एक चेक बाउंस मामले में दिया, जिसमें याचिकाकर्ता को अनियमित रूप से पेश होने और जमानत की शर्तों का पालन न करने के कारण ट्रायल कोर्ट ने उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए उसे फरार घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी का व्यवहार भले ही लापरवाहीपूर्ण रहा हो लेकिन उसे फरार घोषित करना एक गंभीर कानूनी कदम है, जिसके दूरगामी परिणाम होते हैं। इसलिए इसे अपनाने से पहले कानून में निर्धारित सभी प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का पालन अनिवार्य है।
अदालत ने टिप्पणी की,
“किसी व्यक्ति को फरार घोषित करने की शक्ति केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि गंभीर कानूनी परिणामों से जुड़ी होती है। इसलिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि आरोपी की उपस्थिति के लिए सभी उचित प्रयास किए गए हों।”
अदालत ने पाया कि ट्रायल कोर्ट ने सभी आवश्यक प्रयास किए बिना ही दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 82 और 83 के तहत कार्यवाही शुरू कर दी, जो कि जल्दबाजी को दर्शाता है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया से बचने के लिए किसी भी पक्षकार की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता को अंतिम अवसर देते हुए निर्देश दिया कि वह 27 अप्रैल, 2026 तक ट्रायल कोर्ट के समक्ष उपस्थित हो। यदि वह निर्धारित समय में पेश हो जाता है तो उसके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट और फरार घोषित करने की कार्यवाही स्वतः समाप्त हो जाएगी।
साथ ही अदालत ने यह भी आदेश दिया कि निर्धारित तारीख तक याचिकाकर्ता को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा और पेश होने पर उसे जमानत दी जाएगी।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता तय समयसीमा का पालन नहीं करता है तो ट्रायल कोर्ट को कानून के अनुसार आगे कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता होगी।

