समझौते के आधार पर साइबर क्राइम खत्म नहीं किए जा सकते, ये समाज पर व्यापक असर डालते हैं: राजस्थान हाईकोर्ट

Amir Ahmad

8 May 2026 2:45 PM IST

  • समझौते के आधार पर साइबर क्राइम खत्म नहीं किए जा सकते, ये समाज पर व्यापक असर डालते हैं: राजस्थान हाईकोर्ट

    राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि साइबर अपराध केवल दो व्यक्तियों के बीच का निजी विवाद नहीं होते बल्कि ये पूरे डिजिटल सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन में लोगों के भरोसे को प्रभावित करते हैं। ऐसे मामलों को केवल समझौते के आधार पर खत्म करना साइबर अपराधों पर रोक लगाने के लिए बनाए गए कानूनों के उद्देश्य को कमजोर करेगा।

    जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की पीठ ने यह टिप्पणी याचिका खारिज करते हुए की। याचिका में आरोपी ने पक्षों के बीच समझौता होने का हवाला देते हुए FIR रद्द करने की मांग की थी।

    मामले में आरोप था कि आरोपी ने इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का इस्तेमाल कर खुद को पुलिस अधिकारी बताकर शिकायतकर्ता को फोन किए और आपराधिक कार्रवाई की धमकी देकर उससे बड़ी रकम ट्रांसफर करवाई। आरोपी पर भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मामले दर्ज थे।

    सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि साइबर क्राइम निजी प्रकृति के नहीं हैं, बल्कि इनसे डिजिटल व्यवस्था और ऑनलाइन लेनदेन में जनता का भरोसा प्रभावित होता है।

    हाईकोर्ट ने माना कि उसके पास आपराधिक मामलों को रद्द करने की अंतर्निहित शक्ति है लेकिन इसका इस्तेमाल बेहद सावधानी से किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि गंभीर अपराध, जिनका समाज पर व्यापक असर पड़ता है, उन्हें केवल समझौते के आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता।

    अदालत ने परबतभाई आहिर बनाम गुजरात राज्य मामले का हवाला देते हुए कहा कि मामलों को रद्द करने से पहले अपराध की प्रकृति और गंभीरता को देखना जरूरी है। आर्थिक और समाज को प्रभावित करने वाले अपराधों को निजी विवाद नहीं माना जा सकता।

    हाईकोर्ट ने कहा,

    “इस प्रकार के अपराधों में डिजिटल पहचान और इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म्स का दुरुपयोग होता है, जिसके दूरगामी प्रभाव होते हैं। ये केवल संबंधित पक्षों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि पूरे डिजिटल सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन में जनता के भरोसे को प्रभावित करते हैं।”

    अदालत ने स्पष्ट किया कि साइबर अपराधों का असर बड़ी संख्या में उन लोगों पर पड़ सकता है, जो डिजिटल माध्यमों और ऑनलाइन लेनदेन पर भरोसा करते हैं। ऐसे में इन अपराधों को केवल समझौते के आधार पर समाप्त करना उचित नहीं होगा।

    इसी टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने आरोपी की याचिका खारिज की।

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