समय पर पहली अर्जी के बावजूद देरी का बहाना नहीं चलेगा, राजस्थान हाइकोर्ट ने दी राहत

Amir Ahmad

27 March 2026 11:32 AM IST

  • समय पर पहली अर्जी के बावजूद देरी का बहाना नहीं चलेगा, राजस्थान हाइकोर्ट ने दी राहत

    राजस्थान हाइकोर्ट ने करुणामूलक नियुक्ति (कम्पैशनेट अपॉइंटमेंट) से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि यदि पहली अर्जी समय पर दी गई हो तो बाद में देरी का हवाला देकर दूसरी अर्जी खारिज नहीं की जा सकती।

    जस्टिस अशोक कुमार जैन की पीठ ने याचिकाकर्ता की अर्जी खारिज करने का आदेश रद्द कर दिया और राज्य को निर्देश दिया कि 90 दिनों के भीतर मामले पर दोबारा विचार कर उचित पद पर नियुक्ति दी जाए।

    मामले के अनुसार याचिकाकर्ता ने अपने पिता के निधन के बाद वर्ष 2015 में करुणामूलक नियुक्ति के लिए आवेदन किया। उसे मौखिक रूप से बताया गया कि स्नातक की डिग्री पूरी करने पर उसे क्लर्क पद मिल सकता है अन्यथा केवल अधीनस्थ (सब-स्टाफ) पद मिलेगा।

    इसके बाद याचिकाकर्ता ने स्नातक पूरा कर दोबारा आवेदन किया लेकिन राज्य ने इसे समय सीमा से बाहर बताते हुए खारिज किया।

    अदालत ने पाया कि 2015 में दिए गए पहले आवेदन पर न तो कोई सकारात्मक आदेश पारित हुआ और न ही नकारात्मक। साथ ही रिकॉर्ड में यह भी साबित नहीं हुआ कि याचिकाकर्ता को पहले कोई नौकरी ऑफर की गई, जिसे उसने ठुकराया हो।

    पीठ ने कहा कि करुणामूलक नियुक्ति भले ही अधिकार नहीं है लेकिन जब सार्वजनिक प्राधिकरण अपने कर्तव्यों का निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पालन नहीं करता तो अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ता है।

    अदालत ने जेन कौशिक बनाम भारत संघ मामले का हवाला देते हुए कहा कि यदि कोई सार्वजनिक प्राधिकरण अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करता तो यह उसकी चूक मानी जाएगी।

    हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहली अर्जी समय सीमा के भीतर दी गई और उस पर कोई निर्णय न लेकर बाद में दूसरी अर्जी को खारिज करना स्थापित नियमों के खिलाफ है।

    इसी आधार पर अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए खारिजी आदेश रद्द किया और राज्य को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के मामले पर पुनर्विचार कर उचित नियुक्ति दी जाए।

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