नई साजिश या नए तथ्य सामने आने पर दूसरी FIR दर्ज हो सकती है: राजस्थान हाईकोर्ट
Amir Ahmad
4 May 2026 1:02 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि बाद की जांच में नए तथ्य सामने आएं या किसी बड़े षड्यंत्र का खुलासा हो तो उसी घटनाक्रम से जुड़े मामले में दूसरी FIR दर्ज की जा सकती है। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में दूसरी प्राथमिकी कानूनन वैध होगी।
जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने यह टिप्पणी याचिका खारिज करते हुए की, जिसमें याचिकाकर्ता ने अपने खिलाफ दर्ज FIR को यह कहते हुए चुनौती दी थी कि वह उसी मामले में दर्ज दूसरी FIR है और इसलिए अवैध है।
मामले के अनुसार याचिकाकर्ता उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर तैनात था। विभागीय लेखा परीक्षण में 40 लाख रुपये की कमी सामने आने पर याचिकाकर्ता ने अन्य व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसमें बाद में उसे दोषी ठहराते हुए पांच वर्ष की सजा सुनाई गई।
इसके बाद विभाग द्वारा पुनः लेखा परीक्षण किया गया, जिसमें अतिरिक्त गबन का खुलासा हुआ और जांच में याचिकाकर्ता की भूमिका सामने आई। इसके आधार पर उसके खिलाफ अलग प्राथमिकी दर्ज की गई, जिसे उसने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि जब दूसरी FIR उसी परिस्थितियों से जुड़ी हो लेकिन उसमें अलग संस्करण, व्यापक षड्यंत्र या बाद की जांच से सामने आए अज्ञात तथ्यों का उल्लेख हो तब उसका पंजीकरण वैध है।
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वस्तुतः उसके विरुद्ध पहली FIR है, क्योंकि पहले दर्ज मामला किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ था और स्वयं याचिकाकर्ता ने दर्ज कराया था।
अदालत ने माना कि आगे हुए लेखा परीक्षण में याचिकाकर्ता की विशिष्ट भूमिका सामने आई, इसलिए उसके खिलाफ नई FIR दर्ज करने में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की।

