498ए मामले में ननद को राहत, राजस्थान कोर्ट ने कहा-भावावेश में दूर के रिश्तेदारों को भी फंसा दिया जाता है

Amir Ahmad

21 April 2026 7:21 PM IST

  • 498ए मामले में ननद को राहत, राजस्थान कोर्ट ने कहा-भावावेश में दूर के रिश्तेदारों को भी फंसा दिया जाता है

    राजस्थान हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न से जुड़े मामले में मृतका की विवाहित ननद के खिलाफ दर्ज कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवादों में अक्सर भावावेश में दूर के रिश्तेदारों को भी आरोपी बना दिया जाता है, जबकि उनके खिलाफ ठोस आधार नहीं होता।

    जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने यह टिप्पणी करते हुए मजिस्ट्रेट द्वारा भारतीय दंड संहिता (IPC) धारा 498ए के तहत लिए गए संज्ञान को आंशिक रूप से निरस्त किया।

    मामले में याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिका का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है और पुलिस की रिपोर्ट भी उनके पक्ष में थी। साथ ही यह भी कहा गया कि मृतका अपने वैवाहिक जीवन में सामंजस्य नहीं बैठा पा रही थी और तलाक की बात सामने आने पर उसने आत्महत्या कर ली।

    ननद के संबंध में विशेष रूप से यह तर्क दिया गया कि उसकी शादी मृतका से लगभग 12 वर्ष पहले हो चुकी थी और वह अपने ससुराल में रह रही थी ।ऐसे में उसका इस मामले से कोई सीधा संबंध नहीं है।

    हाईकोर्ट ने कहा कि संज्ञान के स्तर पर आरोपों की सच्चाई की विस्तृत जांच नहीं की जाती बल्कि यह देखा जाता है कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं। हालांकि, ननद के मामले में कोर्ट ने पाया कि उसके खिलाफ कोई ठोस कारण या लाभ की संभावना नहीं दिखती।

    कोर्ट ने कहा,

    “उसका इस मामले में कोई प्रत्यक्ष लाभ नहीं था और न ही यह संभावना है कि वह दहेज की मांग में शामिल रही हो या मृतका को प्रताड़ित किया हो।”

    कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि भारत में वैवाहिक विवादों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और कई बार आवेश में आकर दूर के रिश्तेदारों को भी इसमें घसीट लिया जाता है।

    इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने ननद के खिलाफ दर्ज कार्यवाही रद्द की, जबकि अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही जारी रखने का आदेश बरकरार रखा।

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