सरकारी अनुमति के बिना मुकदमा नहीं: राजस्थान हाइकोर्ट ने JDA अधिकारी के खिलाफ अवैध तोड़फोड़ का मामला रद्द किया

Amir Ahmad

12 March 2026 1:23 PM IST

  • सरकारी अनुमति के बिना मुकदमा नहीं: राजस्थान हाइकोर्ट ने JDA अधिकारी के खिलाफ अवैध तोड़फोड़ का मामला रद्द किया

    राजस्थान हाइकोर्ट ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के प्रवर्तन अधिकारी के खिलाफ दर्ज अवैध प्रवेश और तोड़फोड़ का आपराधिक मामला रद्द किया। अदालत ने कहा कि सरकारी अधिकारी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए कानून के तहत पूर्व स्वीकृति आवश्यक होती है और इसके बिना कार्रवाई जारी नहीं रह सकती।

    जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर की पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा प्रवर्तन अधिकारी के खिलाफ संज्ञान लेने के आदेश को चुनौती दी गई।

    शिकायतकर्ता का आरोप था कि करीब 50–60 लोग उसके परिसर में जबरन घुस आए और वहां की सीमा दीवार तथा प्रवेश द्वार को गिरा दिया। यह भी कहा गया कि यह कार्रवाई जयपुर विकास प्राधिकरण के आयुक्त के निर्देश पर की गई।

    दूसरी ओर याचिकाकर्ता अधिकारी ने अदालत में कहा कि यह कार्रवाई सार्वजनिक भूमि से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया का हिस्सा थी। उस समय वह जयपुर विकास प्राधिकरण में प्रवर्तन अधिकारी के पद पर तैनात थे और अपने वैधानिक कर्तव्यों का पालन कर रहे थे।

    अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 197 का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा किया गया कार्य उसके आधिकारिक कर्तव्य से जुड़ा हो तो उसके खिलाफ अभियोजन शुरू करने से पहले सक्षम प्राधिकारी की अनुमति आवश्यक होती है।

    अदालत ने कहा कि यह देखने की कसौटी यह नहीं है कि कार्य पूरी तरह वैध था या नहीं, बल्कि यह है कि क्या वह कार्य आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान या उनसे संबंधित था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी कार्रवाई में अधिकार से अधिक या प्रक्रिया में कुछ अनियमितता भी हो, तब भी वह संरक्षण से बाहर नहीं हो जाती, बशर्ते उसका संबंध आधिकारिक कार्य से हो।

    पीठ ने यह भी उल्लेख किया कि अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही का प्रस्ताव पहले ही प्राधिकरण के विधि निदेशक और आयुक्त द्वारा स्वीकृत किया गया, इसलिए अधिकारी उनके निर्देशों के तहत ही कार्रवाई कर रहे थे।

    साथ ही अदालत ने जयपुर विकास प्राधिकरण अधिनियम की धारा 78 का भी उल्लेख किया, जो प्राधिकरण के अधिकारियों को सद्भावना में किए गए कार्यों के लिए वैधानिक संरक्षण प्रदान करती है।

    अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सामग्री नहीं है, जिससे यह साबित हो कि अधिकारी ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से शक्ति का दुरुपयोग किया। ऐसे में आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाएगा।

    इन टिप्पणियों के साथ हाइकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा लिया गया संज्ञान अवैध करार देते हुए पूरे आपराधिक मामला रद्द कर दिया।

    Next Story