सीएम को काला झंडा दिखाने वाले युवक की हिरासत में पिटाई के आरोप पर पंजाब DGP का हाईकोर्ट में जवाब, कहा- चोटें खुद पहुंचाने की संभावना से इनकार नहीं
Amir Ahmad
21 Sept 2026 4:29 PM IST

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को काला झंडा दिखाने वाले युवक मोहंजीत सिंह की हिरासत में कथित प्रताड़ना के मामले में पंजाब के डीजीपी ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल किया। डीजीपी ने कहा है कि युवक के शरीर पर मिली चोटों के संबंध में मेडिकल राय के आधार पर इन्हें खुद पहुंचाने या किसी परिचित व्यक्ति के हाथ से लगने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
यह हलफनामा जस्टिस विक्रम अग्रवाल की ओर से 10 सितंबर को मामले को गंभीर बताते हुए राज्य सरकार से कथित घटना के बाद की गई कार्रवाई पर विस्तृत रिपोर्ट मांगे जाने के बाद दाखिल किया गया।
DGP के हलफनामे के अनुसार मोहंजीत की 3 सितंबर को सिविल अस्पताल में मेडिकल जांच कराई गई। उस जांच में किसी नई चोट का उल्लेख नहीं किया गया। हालांकि, उसी शाम उसे सिविल अस्पताल, संगरूर में भर्ती कराया गया जहां मेडिकल-कानूनी रिपोर्ट में उसके शरीर पर 10 चोटें दर्ज की गईं। रिपोर्ट में इन चोटों की अवधि चिकित्सकीय जांच से दो से छह घंटे पहले की बताई गई।
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष कहा कि चोटों का यह समय मोहंजीत के उस आरोप से मेल नहीं खाता, जिसमें उसने दावा किया कि 2 सितंबर की शाम हिरासत के दौरान उसे प्रताड़ित किया गया और उसी दौरान चोटें पहुंचाई गईं। डीजीपी ने यह भी कहा कि 3 सितंबर को सिविल अस्पताल में मोहंजीत की जांच उसके चाचा और वकील की मौजूदगी में हुई, लेकिन उस समय उसने किसी चोट की शिकायत नहीं की थी।
राज्य की कार्रवाई रिपोर्ट के मुताबिक मोहंजीत को 2 सितंबर को मुख्यमंत्री के 'लोक मिलनी' कार्यक्रम के दौरान हिरासत में लिया गया। आरोप है कि कार्यक्रम के लिए बनाए गए मंच के पीछे स्थित एक मकान से उसने काला कपड़ा लहराया और नारे लगाए। इसके बाद पुलिस उसे चीमा थाने ले गई, जहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत एहतियाती कार्रवाई शुरू की गई। उसे थाने की हवालात में रखा गया और बाद में कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। वहां से उसे व्यक्तिगत मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
DGP ने हलफनामे में यह भी बताया कि पुलिस के अनुरोध पर मोहंजीत का डोप टेस्ट कराया गया, जिसमें मॉर्फिन की मौजूदगी पाई गई। मोहंजीत के चाचा और वकील की ओर से आपत्ति जताए जाने के बाद दोबारा कराया गया डोप टेस्ट भी सकारात्मक बताया गया।
राज्य के अनुसार, 3 सितंबर की शाम उसे सूचना मिली कि मोहंजीत घायल अवस्था में सिविल अस्पताल में भर्ती है। इसके अगले दिन 4 सितंबर को मोहंजीत ने बयान दर्ज कराया। इसमें उसने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उसकी पिटाई की उसकी दाढ़ी के बाल खींचे, उसका कच्छेरा फाड़ दिया और उसे निर्वस्त्र कर पीटा गया।
DGP ने कहा कि चोटों के समय को लेकर सामने आई विसंगति को देखते हुए मोहंजीत के बयान को फिलहाल प्रारंभिक जांच के लिए रखा गया। राज्य ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल के गठन की भी जानकारी हाईकोर्ट को दी। इस विशेष जांच दल में मोहाली के SP सिटी, रोपड़ के एसपी जांच और जीरकपुर के ASP को शामिल किया गया। संबंधित रिकॉर्ड जांच समिति को सौंपे जा रहे हैं।
DGP ने कहा कि मामले की जांच विशेष समिति द्वारा की जा रही है। इसी वजह से पंजाब पुलिस नियमों के तहत किसी नामजद पुलिस अधिकारी के खिलाफ आरोपपत्र या आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं की गई।
इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी शिकायत का संज्ञान लिया। हलफनामे के अनुसार आयोग ने 4 सितंबर को मिली शिकायत पर कार्रवाई करते हुए मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत नोटिस जारी किया। आयोग ने संगरूर के जिला मजिस्ट्रेट को आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच करने का निर्देश दिया। इसमें मोहंजीत की मेडिकल स्थिति की जांच के साथ साक्ष्यों के संरक्षण का पहलू भी शामिल है।
मोहंजीत ने BNSS की धारा 528 के तहत हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मामला दर्ज करने और केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच कराने की मांग की।
सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच ब्यूरो की ओर से पेश वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि इस चरण में जवाब की जरूरत नहीं है, क्योंकि अभी कोई नोटिस जारी नहीं किया गया।
मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।

