दोहराव वाली दलीलें, कानून की प्रक्रिया को नजरअंदाज करना अदालत की सहानुभूति की मांग नहीं करता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्टने ड्रग्स मामले में अग्रिम जमानत से किया इनकार

Amir Ahmad

20 Jan 2025 8:06 AM

  • दोहराव वाली दलीलें, कानून की प्रक्रिया को नजरअंदाज करना अदालत की सहानुभूति की मांग नहीं करता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्टने ड्रग्स मामले में अग्रिम जमानत से किया इनकार

    पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने ड्रग्स मामले में आरोपी व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया है, जो इस आधार पर राहत मांग रहा था कि सह-आरोपी को नियमित जमानत दी गई, यह देखते हुए कि याचिकाकर्ता ने जानबूझकर 2 साल से अधिक समय तक अपनी गिरफ्तारी से बचने की कोशिश की।

    जस्टिस सुमीत गोयल ने कहा,

    "किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा को उच्च रखा जाना चाहिए। फिर भी किसी को भी न्याय की प्रक्रिया को बाधित करने और उसमें व्यवधान पैदा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। लंबे समय तक अनुपस्थित रहना, कानून की प्रक्रिया को नजरअंदाज करना और गिरफ्तारी से पहले जमानत के लिए दलीलों को बार-बार दोहराना बिना किसी ठोस कारण के निश्चित रूप से ऐसा कार्य/व्यवहार नहीं है, जिसके लिए अदालत की सहानुभूति की आवश्यकता हो।"

    न्यायालय ने पाया कि याचिकाकर्ता के सह-आरोपी ने स्वेच्छा से कानूनी प्रक्रिया के अधीन होकर 2 वर्ष से अधिक समय तक कारावास भोगा। इसके विपरीत याचिकाकर्ता ने जानबूझकर अपनी गिरफ्तारी से बचने का प्रयास किया तथा 2 वर्ष से अधिक समय तक कानूनी प्रक्रिया के अधीन रहने में विफल रहा।

    जज ने कहा,

    "इस तरह का आचरण न्यायिक प्रक्रिया के प्रति स्पष्ट उपेक्षा को दर्शाता है तथा याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत देने से इनकार करने का सम्मोहक आधार बनता है। याचिकाकर्ता द्वारा लंबे समय तक अग्रिम जमानत देने से बचना अग्रिम जमानत को नियंत्रित करने वाले प्रावधानों के तहत उसके पक्ष में विवेकाधिकार के प्रयोग के विरुद्ध है।"

    ये टिप्पणियां NDPS Act की धारा 18(c) और 29 के तहत ड्रग्स मामले में गुरप्रीत सिंह नामक व्यक्ति की दूसरी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए की गईं।

    पहली अग्रिम जमानत याचिका सितंबर 2022 में पेश की गई तथा उसे हाईकोर्ट ने खारिज किया। इसके बाद यह तर्क दिया गया कि सह-आरोपी के प्रकटीकरण कथन के आधार पर उसे झूठे तरीके से FIR में फंसाया गया और आरोपों की गंभीरता पर उस समय विचार किया गया। उसके बाद उक्त याचिका खारिज की गई।

    इसके बाद वर्तमान दूसरी याचिका में याचिकाकर्ता ने पहले लिए गए आधारों को दोहराया सिवाय इस आधार के कि सह-आरोपी को न्यायालय द्वारा नियमित जमानत की रियायत दी गई।

    प्रस्तुतियों की जांच करने के बाद न्यायालय ने कहा,

    "यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता ने 21⁄2 वर्षों से अधिक समय तक कानून की प्रक्रिया से बचने का प्रयास किया। बिना किसी उचित कारण के इतनी लंबी अवधि तक गिरफ्तारी से बचने में याचिकाकर्ता के आचरण पर इस दूसरी याचिका पर निर्णय लेते समय विचार किया जाना चाहिए। न्याय की प्रक्रिया का मतलब है कि प्रत्येक व्यक्ति के साथ न्यायसंगत और निष्पक्ष तरीके से व्यवहार किया जाए।"

    जस्टिस गोयल ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता-आरोपी विधिक कार्यवाही को विफल करने के उद्देश्य से अनुचित देरी सहित अनियमित और जटिल रणनीति अपनाता है तो यह न्याय की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

    न्यायालय ने यह कहते हुए याचिका खारिज की कि परिस्थितियों में कोई नया महत्वपूर्ण परिवर्तन सामने नहीं आया, जिससे यह संकेत मिले कि याचिकाकर्ता अग्रिम जमानत के लिए अपनी दूसरी याचिका को बरकरार रखने का हकदार है।

    केस टाइटल- गुरप्रीत सिंह बनाम पंजाब राज्य

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