बच्चे की कस्टडी पिता के पास हो तो हैबियस कॉर्पस याचिका नहीं चलेगी: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
Amir Ahmad
26 March 2026 12:35 PM IST

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि जब बच्चा अपने प्राकृतिक अभिभावक (नेचुरल गार्जियन) के पास हो और उसके जीवन या सुरक्षा को कोई तात्कालिक खतरा न हो तो ऐसे मामलों में हैबियस कॉर्पस याचिका सुनवाई योग्य नहीं होती।
जस्टिस सुमीत गोयल ने यह फैसला एक मां की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें उसने अपनी 9 वर्षीय बेटी की कस्टडी पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
पूरा मामला
मां ने आरोप लगाया कि उसकी बेटी को पिता और उसके परिवार ने अवैध रूप से अपने पास रखा हुआ है। उसने कहा कि मां होने के नाते उसे बच्चे की कस्टडी का अधिकार है और बच्चे को तीसरे व्यक्ति के पास रखना गलत है।
यह विवाद पति-पत्नी के बीच मतभेद के बाद पैदा हुआ, जब अगस्त 2024 से दोनों अलग रह रहे हैं और बच्ची पिता व दादा-दादी के साथ रह रही है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि हैबियस कॉर्पस याचिका तभी दायर की जा सकती है, जब किसी व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया हो।
अदालत ने कहा,
“जब बच्चा अपने प्राकृतिक अभिभावक के पास है तो ऐसी कस्टडी को सामान्य रूप से अवैध नहीं माना जा सकता, जिससे हैबियस कॉर्पस जारी किया जाए।”
अदालत ने यह भी कहा कि केवल आशंका के आधार पर याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती। जब तक बच्चे के जीवन या सुरक्षा को कोई स्पष्ट और तात्कालिक खतरा न दिखे, तब तक अदालत हस्तक्षेप नहीं करेगी।
अदालत ने कहा,
“सिर्फ आशंका बिना किसी ठोस प्रमाण के असाधारण अधिकार क्षेत्र के इस्तेमाल का आधार नहीं बन सकती।”
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में बच्चे के हित और कस्टडी का फैसला विस्तृत जांच के बाद ही किया जा सकता है, जो कि फैमिली कोर्ट या अभिभावकता कानूनों के तहत संभव है।अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह सुनवाई योग्य नहीं है लेकिन याचिकाकर्ता को उचित मंच पर जाने की स्वतंत्रता दी गई।

