'यारियां 2' में गैर-अमृतधारी कृपाण पहनने पर FIR रद्द, हाईकोर्ट ने कहा- जानबूझकर धार्मिक भावनाएं भड़काने का इरादा नहीं
Amir Ahmad
9 Sept 2026 12:15 PM IST

फिल्म यारियां 2 के एक गाने में गैर-अमृतधारी एक्टर को कृपाण पहने दिखाने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने निर्देशक, निर्माता और एक्टर के खिलाफ दर्ज FIR रद्द की। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी फिल्म में धार्मिक प्रतीक का अनजाने में किया गया कलात्मक चित्रण, जब उसके पीछे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण मंशा न हो, भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295-ए के तहत अपराध नहीं बनता।
जस्टिस शालिनी नागपाल ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि किसी गाने में गैर-अमृतधारी सिख को श्री साहिब/किरपान पहने दिखाना अपने आप में सिख धर्म का अपमान नहीं माना जा सकता। कोर्ट के अनुसार फिल्म में गीत का चित्रण रचनात्मक स्वतंत्रता और कलात्मक अभिव्यक्ति का हिस्सा है। पांच ककारों में शामिल श्री साहिब का अनजाने में किया गया चित्रण यह साबित नहीं करता कि किसी धार्मिक समुदाय की भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाने की कोशिश की गई।
कोर्ट ने कहा,
“बिना जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण मंशा के किया गया ऐसा चित्रण धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए किया गया कृत्य नहीं माना जा सकता।”
मामला उस समय सामने आया, जब शिकायतकर्ता हरप्रीत सिंह ने आरोप लगाया कि टी-सीरीज की ओर से जारी 'यारियां 2' के एक गाने में एक्टर नीजान जाफरी को, जो अमृतधारी नहीं हैं और जिनकी दाढ़ी नहीं है, श्री साहिब पहने दिखाया गया। शिकायत में कहा गया कि सिख धार्मिक परंपरा के अनुसार श्री साहिब धारण करने का अधिकार अमृतधारी सिख को है। आरोप लगाया गया कि फिल्म के निर्देशक राधिका राव, सह-निर्देशक विनय सप्रू और निर्माता भूषण कुमार ने धार्मिक भावनाएं आहत करने के इरादे से यह चित्रण किया।
इस शिकायत के आधार पर 30 अगस्त 2023 को IPC की धारा 295-ए के तहत FIR दर्ज की गई। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि इसी गीत और आरोपों को लेकर अमृतसर में भी FIR दर्ज हुई, इसलिए दूसरी FIR कायम नहीं रह सकती। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मौजूदा FIR 30 अगस्त 2023 को दर्ज हुई, जबकि अमृतसर वाली FIR 31 अगस्त 2023 को दर्ज की गई। इसलिए मौजूदा मामला दूसरी FIR नहीं, बल्कि पहले दर्ज हुई FIR है। अमृतसर की FIR को भी इसी हाईकोर्ट ने 28 अक्टूबर 2024 को रद्द किया।
मामले के गुण-दोष पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 295-ए लागू होने के लिए केवल किसी धार्मिक भावना के आहत होने का दावा पर्याप्त नहीं है। इसके लिए यह दिखाना जरूरी है कि संबंधित कृत्य में किसी धर्म या धार्मिक विश्वास का अपमान किया गया और ऐसा जानबूझकर तथा दुर्भावनापूर्ण इरादे से धार्मिक भावनाओं को भड़काने के उद्देश्य से किया गया।
हाईकोर्ट ने संविधान पीठ के फैसले रामजी लाल मोदी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार का हवाला देते हुए कहा कि धारा 295-ए हर प्रकार के धार्मिक अपमान को दंडित नहीं करती, बल्कि केवल गंभीर और जानबूझकर किए गए अपमान को अपराध बनाती है। कोर्ट ने एम.एस. धोनी बनाम येर्रागुंटला श्यामसुंदर और प्रिया प्रकाश वारियर बनाम तेलंगाना सरकार के फैसलों का भी उल्लेख किया।
कोर्ट ने फिल्मों में रचनात्मक स्वतंत्रता के संबंध में मनोहर लाल शर्मा बनाम संजय लीला भंसाली मामले में तीन जस्टिस की पीठ की टिप्पणियों को भी ध्यान में रखा। कोर्ट ने कहा कि सिनेमाई प्रस्तुति में कलात्मक स्वतंत्रता का अपना संवैधानिक संरक्षण है और केवल किसी चित्रण से असहमति होना अपने आप में आपराधिक मंशा साबित नहीं करता।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि एक व्यक्ति की ओर से जताई गई आपत्ति को पूरे सिख समुदाय की सामूहिक धार्मिक भावना नहीं माना जा सकता। अदालत ने इस तथ्य को भी महत्व दिया कि विवादित दृश्य बाद में हटा दिए गए और याचिकाकर्ताओं की ओर से सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न होने का भरोसा दिया गया।
इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने माना कि शिकायत में लगाए गए आरोपों को पूरी तरह सही मान लेने के बाद भी धारा 295-ए के तहत अपराध के आवश्यक तत्व सामने नहीं आते। अदालत ने इसे भजन लाल मामले में तय उन परिस्थितियों में शामिल माना, जहां आरोपों को पूरी तरह स्वीकार करने के बावजूद किसी अपराध का गठन नहीं होता।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने निर्देशक राधिका राव, सह-निर्देशक विनय सप्रू और निर्माता भूषण कुमार के खिलाफ दर्ज FIR तथा उससे जुड़ी सभी आगामी कार्यवाहियों को रद्द किया।


