डॉक्टरों के बिना अस्पताल सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारत, स्वास्थ्य सेवाएं कागजी आश्वासन नहीं हो सकतीं: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
Amir Ahmad
19 May 2026 1:57 PM IST

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा में आयुष विभाग के डॉक्टरों की असमान तैनाती पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं केवल कागजी आश्वासन बनकर नहीं रह सकतीं। अदालत ने कहा कि डॉक्टरों के बिना अस्पताल केवल ईंट-पत्थर की इमारत बनकर रह जाते हैं, जो नागरिकों के जीवन के अधिकार की रक्षा नहीं कर सकते।
जस्टिस संदीप मौदगिल ने कहा,
“संवैधानिक मूल्यों से संचालित कल्याणकारी राज्य में स्वास्थ्य सेवाएं केवल आंकड़ों या कागजी दावों तक सीमित नहीं रह सकतीं। यह जमीनी स्तर पर डॉक्टरों और कार्यरत मेडिकल इंस्टिट्यूट की वास्तविक उपलब्धता में दिखना चाहिए।”
अदालत ने कहा कि राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी केवल अस्पताल और संस्थान स्थापित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी उसका दायित्व है कि वे प्रभावी रूप से कार्य करें और सभी नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराएं।
हाईकोर्ट ने कहा कि स्वास्थ्य का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले कंज्यूमर एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर बनाम भारत संघ का हवाला देते हुए कहा कि पर्याप्त मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य का संवैधानिक दायित्व है।
अदालत ने यह भी कहा कि “जन स्वास्थ्य और अस्पताल” राज्य सूची का विषय हैं इसलिए सभी नागरिकों तक सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना राज्य की निरंतर जिम्मेदारी है।
हाईकोर्ट ने कहा कि वह सतर्क प्रहरी की भूमिका में कार्य कर रहा है। ऐसे मामलों में मूकदर्शक नहीं रह सकता, जहां प्रशासनिक निष्क्रियता नागरिकों के मौलिक अधिकारों को प्रभावित करती हो।
रिकॉर्ड की जांच करने के बाद अदालत ने पाया कि हरियाणा के आयुष विभाग में आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों की तैनाती बेहद असंतुलित है। कुछ केंद्रों पर जरूरत से ज्यादा डॉक्टर तैनात हैं, जबकि कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त डॉक्टर तक नहीं हैं।
अदालत के पूर्व आदेशों के अनुपालन में आयुष विभाग के अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन) द्वारा दाखिल हलफनामे में बताया गया कि रिक्त पद होने के बावजूद कई स्थानों पर अतिरिक्त तैनाती जारी है।
सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित आयुष विभाग के निदेशक ने बताया कि वर्तमान में 97 आयुर्वेदिक मेडिकल अधिकारी अतिरिक्त तैनाती में हैं और उनका पुनर्वितरण किया जाएगा।
हालांकि, अदालत ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि यह असंतुलन मुख्य रूप से अधिकारियों द्वारा शहरी क्षेत्रों में तैनाती पसंद करने के कारण पैदा हुआ।
हाईकोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में प्रशासनिक सुविधा को संवैधानिक आवश्यकता के आगे झुकना होगा।
अदालत ने आयुष विभाग के निदेशक को निर्देश दिया कि दो सप्ताह के भीतर सभी औषधालयों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यकता के अनुसार डॉक्टरों का व्यापक पुनर्वितरण किया जाए।
हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि आयुर्वेदिक मेडिकल अधिकारियों के 603 से अधिक पद खाली पड़े हैं। अदालत ने कहा कि 2023 के विज्ञापन के बाद 2025 में भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, फिर भी पद भरे नहीं गए हैं, जिससे राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
अदालत ने हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव, आयुष विभाग को निर्देश दिया कि वह इस मामले की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करें और महानिदेशक से परामर्श के बाद हलफनामा दाखिल करें।
हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि रिक्त पद भरने में देरी क्यों हुई, भर्ती की समयसीमा क्या होगी और तब तक डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए क्या अंतरिम कदम उठाए जाएंगे।
मामले की अगली सुनवाई 27 मई, 2026 को होगी।

