16 वर्ष बाद दर्ज कराई बलात्कार की FIR हाईकोर्ट ने की रद्द, कहा- संबंध सहमति से था
Amir Ahmad
1 May 2026 12:33 PM IST

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 16 वर्ष की देरी से दर्ज दुष्कर्म FIR रद्द करते हुए कहा कि लंबे समय तक चले सहमति आधारित संबंध को केवल विवाह के झूठे वादे के आधार पर दुष्कर्म नहीं माना जा सकता, विशेषकर जब शिकायत दर्ज कराने में असाधारण और अस्पष्ट देरी हो।
जस्टिस एन.एस. शेखावत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 और 506 के तहत दर्ज FIR निरस्त करते हुए कहा कि मामले के तथ्यों से दुष्कर्म का अपराध प्रथमदृष्टया स्थापित नहीं होता।
अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता स्वयं स्वीकार करती है कि उसे वर्ष 2001-02 से ही यह जानकारी थी कि आरोपी विवाहित है, फिर भी उसने 29 जुलाई 2017 को प्राथमिकी दर्ज कराई, जो लगभग 16 वर्ष की देरी है।
हाइकोर्ट ने टिप्पणी की,
“यह विश्वास करना कठिन है कि शिकायतकर्ता ने केवल विवाह के कथित आश्वासन पर इतने वर्षों तक शारीरिक संबंध बनाए रखे, जबकि उसे आरोपी के विवाह की जानकारी पहले से थी।”
अदालत ने यह भी कहा कि यह मानना असंभव है कि एक शिक्षित एवं वयस्क महिला लगभग 16 वर्षों तक आरोपी के कथित छल को समझ ही न सकी।
मामले में आरोप था कि आरोपी ने विवाह का झूठा वादा कर वर्षों तक शारीरिक संबंध बनाए धमकियां दीं तथा अपने परिवारजनों के साथ मिलकर उत्पीड़न किया। आरोपी पुलिस अधिकारी है। उसने कहा कि आरोप स्वाभाविक रूप से अविश्वसनीय हैं और FIR में अत्यधिक विलंब हुआ।
राज्य और शिकायतकर्ता ने तर्क दिया कि संबंध विवाह के झूठे आश्वासन पर आधारित था जिससे सहमति अमान्य हो जाती है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि केवल विवाह का वादा पूरा न होना अपने आप में दुष्कर्म नहीं बनाता। इसके लिए यह सिद्ध होना आवश्यक है कि वादा करते समय ही आरोपी की नीयत विवाह करने की नहीं थी और उसने छलपूर्वक संबंध स्थापित किए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अच्छे विश्वास में किया गया वादा बाद में पूरा न होना और शुरू से ही झूठा वादा करना दोनों अलग स्थितियां हैं।
इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने माना कि दोनों पक्षों के बीच सहमति से संबंध थे और FIR में दुष्कर्म के आवश्यक तत्व अनुपस्थित हैं।
फलस्वरूप, अदालत ने FIR रद्द की।

