वकील को केस वापस लेने की धमकी पर हाईकोर्ट सख्त, FIR और SIT जांच के आदेश
Amir Ahmad
28 Sept 2026 12:04 PM IST

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील को मुकदमा वापस लेने की धमकी दिए जाने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए FIR दर्ज करने और विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी वकील को न्यायिक कार्यवाही से पीछे हटने के लिए धमकाना न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप है और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
जस्टिस एन.एस. शेखावत ने चंडीगढ़ के सीनियर पुलिस अधीक्षक को वकील की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर FIR दर्ज करने का निर्देश दिया। साथ ही चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशक को पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में SIT गठित करने को कहा।
मामला एक ऐसी याचिका से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता ने जेल में बंद आरोपियों से जुड़े मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की। याचिकाकर्ता का आरोप है कि उसके पति को मादक पदार्थों से जुड़े मामले में झूठा फंसाया गया और जेल में बंद कुछ आरोपी कथित तौर पर अवैध मादक पदार्थ नेटवर्क चला रहे हैं तथा उनका अपराधियों से संबंध है।
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील गोबिंद सिंह रंधावा ने हाईकोर्ट को बताया कि 22 सितंबर की रात करीब 10:48 बजे उन्हें एक अज्ञात विदेशी नंबर से फोन आया। आरोप है कि फोन करने वाले ने याचिका वापस लेने की मांग की और ऐसा नहीं करने पर उन्हें तथा उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
वकील के अनुसार फोन काटने के बाद उन्हें सात रिकॉर्डेड वॉइस मैसेज मिले और 17 बार फोन किया गया। कथित मैसेजेस में जेल में बंद कुछ लोगों की ओर से मोबाइल फोन के इस्तेमाल में आ रही परेशानियों के लिए वकील को जिम्मेदार ठहराते हुए मुकदमा वापस लेने को कहा गया। आरोप है कि फोन करने वाले ने उनके परिवार के सदस्यों के बारे में जानकारी होने का दावा भी किया और उन्हें सबक सिखाने की धमकी दी।
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चंडीगढ़ प्रशासन को भी पक्षकार बनाया। चंडीगढ़ के लोक अभियोजक ने अदालत में नोटिस स्वीकार किया। इसके बाद हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को शिकायत के आधार पर मामला दर्ज करने और पुलिस महानिदेशक को SIT गठित करने का निर्देश दिया।
SIT को अपराधियों के साथ-साथ पुलिस और जेल अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करने की छूट दी गई। यदि जांच में किसी अधिकारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। इसके अलावा पुलिस को वकील और उनके परिवार की सुरक्षा संबंधी खतरे का आकलन कर आवश्यक कदम उठाने को कहा गया।
जस्टिस शेखावत ने कहा कि किसी अपराधी की ओर से वकील को मुकदमा वापस लेने के लिए धमकाने का प्रयास न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप है और प्रथम दृष्टया आपराधिक अवमानना का मामला बनता है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि इस घटना से अपराधियों, जेल अधिकारियों और पंजाब पुलिस के अधिकारियों के बीच कथित सांठगांठ के आरोपों की गंभीरता सामने आती है।
जस्टिस शेखावत ने टिप्पणी की,
“अब तक गैंगस्टर आम लोगों को धमकाते थे, लेकिन अब अदालत की कार्यवाही में बाधा डालने का प्रयास किया गया। यह न्यायिक संस्था पर सीधा हमला है और न्याय प्रशासन में इस तरह के हस्तक्षेप को हल्के में नहीं लिया जा सकता।”
हाईकोर्ट ने SIT के प्रमुख को जांच की स्थिति पर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने उम्मीद जताई कि धमकी देने वाले लोगों को तत्काल गिरफ्तार किया जाएगा।
मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर 2026 को होगी।

