पहली पत्नी की मृत्यु के बाद हुई शादी, फिर भी 'दूसरी पत्नी' बताकर आधी पेंशन नहीं रोकी जा सकती: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

Amir Ahmad

16 Jun 2026 1:39 PM IST

  • पहली पत्नी की मृत्यु के बाद हुई शादी, फिर भी दूसरी पत्नी बताकर आधी पेंशन नहीं रोकी जा सकती: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

    पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने फैमिली पेंशन से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के समय केवल एक ही विधवा जीवित है और पहली पत्नी से कोई पात्र आश्रित मौजूद नहीं है, तो जीवित विधवा को पूरी यानी 100 प्रतिशत फैमिली पेंशन मिलेगी। केवल उसे दूसरी पत्नी बताकर पेंशन का आधा हिस्सा रोका नहीं जा सकता।

    जस्टिस नमित कुमार ने कहा कि पेंशन के बंटवारे का नियम तभी लागू होता है, जब एक ही समय में एक से अधिक पात्र दावेदार मौजूद हों। यदि केवल एक ही पात्र व्यक्ति है तो राज्य सरकार पेंशन का कोई हिस्सा अपने पास नहीं रख सकती।

    मामला मनजीत कौर की याचिका से जुड़ा था। उनके पति परशोतम लाल पुरी पंजाब सरकार में जिला कोषाधिकारी के पद से वर्ष 1996 में सेवानिवृत्त हुए। वर्ष 2011 में उनका निधन हो गया।

    उनकी पहली पत्नी का निधन वर्ष 1980 में हो चुका था, जिसके बाद उन्होंने वर्ष 1992 में मनजीत कौर से विवाह किया।

    पति की मृत्यु के बाद वर्ष 2015 में मनजीत कौर को फैमिली पेंशन स्वीकृत की गई लेकिन उन्हें केवल 50 प्रतिशत पेंशन देने का आदेश जारी किया गया। अधिकारियों ने यह कहते हुए उनका दावा सीमित किया कि वह मृतक कर्मचारी की दूसरी पत्नी हैं।

    मनजीत कौर ने कई बार पूर्ण पेंशन की मांग की लेकिन वर्ष 2022 में उनका दावा खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

    सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि जिस नियम का हवाला देकर पेंशन आधी की गई वह केवल उन मामलों में लागू होता है, जहां एक से अधिक विधवाएं या किसी अन्य पत्नी से नाबालिग और पात्र बच्चे मौजूद हों।

    इस मामले में पहली पत्नी का निधन कर्मचारी की मृत्यु से कई वर्ष पहले हो चुका था और उससे कोई ऐसा पात्र आश्रित भी नहीं था, जो पेंशन का दावा कर सके।

    अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में मनजीत कौर ही एकमात्र पात्र दावेदार हैं। यदि सरकार की दलील स्वीकार कर ली जाए तो इसका अर्थ होगा कि फैमिली पेंशन का एक हिस्सा सरकार स्वयं रख ले, जो न केवल अनुचित बल्कि पेंशन योजना के उद्देश्य के भी विपरीत होगा।

    हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा,

    “यदि अधिकारियों की व्याख्या स्वीकार कर ली जाए तो यह एक हास्यास्पद और अन्यायपूर्ण स्थिति होगी, जिसमें मृत कर्मचारी के परिवार के लिए निर्धारित पेंशन का एक हिस्सा राज्य अपने पास रख लेगा। यह फैमिली पेंशन योजना की भावना और उद्देश्य के खिलाफ है।”

    अदालत ने यह भी दोहराया कि फैमिली पेंशन मृत कर्मचारी के वैध उत्तराधिकारियों का अधिकार है और यह उसकी संपत्ति का हिस्सा मानी जाती है। इसलिए जब केवल एक पात्र लाभार्थी मौजूद हो तो उसे पूरी पेंशन दी जानी चाहिए।

    हाईकोर्ट ने 25 मई 2022 का आदेश रद्द करते हुए मनजीत कौर को 100 प्रतिशत फैमिली पेंशन देने का निर्देश दिया।

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