लंबे समय तक जेल में रहने के बाद 25 आपराधिक मामले भी जमानत से इनकार का अकेला आधार नहीं: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
Amir Ahmad
3 Sept 2026 1:40 PM IST

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कार चोरी से जुड़े मामले में लंबे समय से जेल में बंद आरोपी को नियमित जमानत देते हुए स्पष्ट किया कि किसी आरोपी के खिलाफ दर्ज कई अन्य आपराधिक मामले अपने आप में जमानत से इनकार करने का एकमात्र आधार नहीं हो सकते।
जस्टिस मनीषा बत्रा ने कहा कि आरोपी की अन्य मामलों में संलिप्तता को जमानत का लाभ देने से इनकार करने का अकेला कारण नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने आरोपी की हिरासत की अवधि, मौजूदा अपराध की प्रकृति और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए जमानत देना उचित माना, हालांकि कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की।
मामला जनवरी 2024 में दर्ज FIR से जुड़ा है। शिकायतकर्ता की स्विफ्ट कार उसके घर के बाहर से चोरी हो गई। CCTV फुटेज के आधार पर डिंपल कपूर हनी को गिरफ्तार किया गया। उसके बयान के आधार पर तीन अन्य आरोपियों हरप्रीत उर्फ घंटा, नीरज उर्फ शिशु और गिरजाशंकर उर्फ बॉबी को गिरफ्तार किया गया।
इन आरोपियों ने कथित तौर पर चोरी की कार में अपनी संलिप्तता स्वीकार की और बताया कि उन्होंने वाहन को एक लाख रुपये में याचिकाकर्ता को बेच दिया।
याचिकाकर्ता को 20 सितंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर बताया कि उसने चोरी किए गए वाहन के अलग-अलग हिस्सों को विभिन्न ग्राहकों को 1.30 लाख रुपये में बेच दिया। जांच पूरी हो चुकी थी और पुलिस की ओर से आरोपपत्र भी अदालत में दाखिल किया जा चुका था।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि पिछली जमानत याचिका खारिज होने के बाद चार महीने से अधिक समय बीत चुका है। अब जांच के लिए उसकी हिरासत की जरूरत नहीं है और आरोपपत्र भी दाखिल हो चुका है। अपराध मजिस्ट्रेट द्वारा सुनवाई योग्य है और मुकदमे के पूरा होने में काफी समय लग सकता है। ऐसे में उसे अनिश्चितकाल तक केवल अन्य मामलों में संलिप्तता के आधार पर जेल में रखना उचित नहीं है।
राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोप गंभीर हैं। आरोपी के खिलाफ इसी तरह के अपराधों का लंबा आपराधिक इतिहास है और उसके खिलाफ कुल 25 मामले दर्ज हैं। राज्य ने आशंका जताई कि जमानत पर रिहा होने के बाद वह दोबारा इसी तरह के अपराध कर सकता है।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए कहा कि आरोपी पर चोरी का वाहन हासिल करने और उसके हिस्सों को अलग-अलग लोगों को बेचने का आरोप है। वह 20 सितंबर 2025 से हिरासत में है और मुकदमे के पूरा होने में निश्चित रूप से समय लगेगा।
कोर्ट ने इन परिस्थितियों को अपराध की प्रकृति और आरोपी की अब तक की हिरासत की अवधि के साथ तौलते हुए जमानत देना उचित माना।
जस्टिस मनीषा बत्रा ने स्पष्ट किया कि अन्य मामलों में आरोपी की संलिप्तता को जमानत से इनकार करने का अकेला आधार नहीं बनाया जा सकता।
हाईकोर्ट ने कहा कि यह आदेश मामले के गुण-दोष पर किसी तरह की राय व्यक्त किए बिना पारित किया जा रहा है। कोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए आरोपी को नियमित जमानत दी। उसे निचली अदालत की संतुष्टि के अनुसार निजी मुचलका और जमानती मुचलका भरने पर रिहा करने का निर्देश दिया गया।


