PMLA मामले में पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा को हाईकोर्ट से झटका, जमानत याचिका खारिज
Amir Ahmad
16 Oct 2026 12:54 PM IST

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा की जमानत याचिका शुक्रवार को खारिज की। अरोड़ा को उनकी पूर्व कंपनी से जुड़े करीब 100 करोड़ रुपये के जीएसटी घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया गया।
जस्टिस कुलदीप तिवारी ने उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया। मामले में विस्तृत आदेश अभी जारी नहीं हुआ।
संजीव अरोड़ा ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) के तहत अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया। उन्होंने गिरफ्तारी, गिरफ्तारी के आधार और हिरासत में भेजने के आदेश को रद्द करने की मांग की थी।
उनकी दलील थी कि गिरफ्तारी के दौरान कानून में निर्धारित सुरक्षा उपायों और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया गया।
अरोड़ा अप्रैल 2022 से जुलाई 2025 तक राज्यसभा सांसद रहे थे। वह हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन और प्रमोटर भी रह चुके हैं। यह कंपनी पहले रितेश प्रॉपर्टीज एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के नाम से जानी जाती थी।
फिलहाल अरोड़ा गुरुग्राम की भोंडसी जेल में न्यायिक हिरासत में हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) कंपनी के मोबाइल फोन निर्यात कारोबार में कथित अनियमितताओं से जुड़े धन शोधन मामले की जांच कर रहा है।
याचिका के अनुसार, मई से अक्टूबर 2023 के बीच कंपनी ने संयुक्त अरब अमीरात के खरीदारों को 43 खेपों में करीब 102.50 करोड़ रुपये के एप्पल और सैमसंग मोबाइल फोन निर्यात किए। इन सौदों के संबंध में कंपनी ने जीएसटी रिफंड और सीमा शुल्क में छूट का लाभ भी मांगा। हालांकि, कर अधिकारियों ने इन दावों पर आपत्ति जताई और नवंबर 2024 में दो करोड़ रुपये से अधिक का जीएसटी रिफंड खारिज कर दिया गया।
अरोड़ा की याचिका में कहा गया कि मई 2025 में कंपनी ने कमाल अहमद, अजहर हैदर उर्फ मोंटी और अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
आरोप है कि फर्जी कंपनियों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट का धोखाधड़ी से लाभ लिया गया। इसके बाद अप्रैल 2026 में ED ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) से जुड़े मामलों में तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान लुधियाना में अरोड़ा के आवास, गुरुग्राम में उनके बेटे काव्या अरोड़ा के आवास और गुरुग्राम के उद्योग विहार स्थित कंपनी के कार्यालय की तलाशी ली गई।
याचिका में दावा किया गया कि इन तलाशियों से पहले कोई सूचना नहीं दी गई।
अरोड़ा ने दलील दी कि तलाशी के दौरान तैयार किए गए पंचनामे के अनुसार उनके आवास से कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई।
उन्होंने यह भी कहा कि शिकायत दर्ज होने के महज 82 मिनट के भीतर संबंधित प्राथमिकी दर्ज कर ली गई और इस दौरान स्वतंत्र रूप से तथ्यों की पुष्टि नहीं की गई। इस FIR को रद्द करने की मांग वाली एक अलग याचिका भी हाईकोर्ट में लंबित है।
प्रवर्तन निदेशालय ने इसी प्राथमिकी को आधार बनाकर मई 2026 में धन शोधन की जांच से जुड़ी प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) दर्ज की। इसके बाद कंपनी के बैंक खातों और अरोड़ा की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क करने की कार्रवाई की गई। अंततः 9 मई को पीएमएलए की धारा 19 के तहत अरोड़ा को गिरफ्तार कर लिया गया।
अरोड़ा ने अपनी गिरफ्तारी और हिरासत में भेजे जाने के आदेश को अवैध बताते हुए कहा कि उनका बयान दर्ज किए जाने के करीब 35 मिनट के भीतर गिरफ्तारी के आधार बताने वाला 17 पन्नों का दस्तावेज उन्हें सौंप दिया गया। उनके मुताबिक, इतनी कम अवधि में दस्तावेज तैयार कर दिए जाने से संकेत मिलता है कि गिरफ्तारी का फैसला पहले ही कर लिया गया।
इससे पहले, गुरुग्राम के जिला एवं सेशंस जज ने 15 जून को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 483 और PMLA की धारा 45 के तहत दायर उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
इसके बाद अरोड़ा ने हाईकोर्ट में राहत की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने भी उनकी जमानत याचिका खारिज की।

