पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का आदेश: आग में जले दस्तावेज दोबारा तैयार कराने के लिए उम्रकैद कैदी को पैरोल

Amir Ahmad

22 May 2026 6:22 PM IST

  • पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का आदेश: आग में जले दस्तावेज दोबारा तैयार कराने के लिए उम्रकैद कैदी को पैरोल

    पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने उम्रकैद कैदी को आग की घटना में नष्ट हुए जरूरी दस्तावेज दोबारा तैयार कराने के लिए 8 सप्ताह की पैरोल देने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि केवल शांति भंग होने की आशंका के आधार पर पैरोल से इनकार करना कानूनन सही नहीं माना जा सकता।

    जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने कहा,

    “मामले के तथ्यों से स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता की समाज में गहरी जड़ें हैं और अपने भाई से मिलने तथा आग में जल चुके दस्तावेज दोबारा तैयार कराने के लिए पैरोल मांगने का उसका कारण उचित है।”

    अदालत ने यह भी कहा कि पैरोल पर विचार करते समय समाजहित और कैदी के सुधार, दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। अदालत के अनुसार पैरोल का उद्देश्य कैदी के सुधार और पुनर्वास को बढ़ावा देना है।

    मामले में याचिकाकर्ता वर्ष 2021 के हत्या मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। उसने पंजाब गुड कंडक्ट प्रिजनर्स एक्ट, 1962 के तहत पैरोल की मांग की थी। उसके वकील ने अदालत को बताया कि वह 5 वर्ष 7 महीने से जेल में है और इस दौरान उसका आचरण संतोषजनक रहा है। उसके खिलाफ जेल में किसी तरह के अनुशासनहीनता के आरोप भी नहीं हैं।

    हालांकि, प्रशासन ने यह कहते हुए पैरोल देने से इनकार किया था कि वह गंभीर अपराध में दोषी है और उसकी रिहाई से गांव में शांति भंग हो सकती है। यह भी कहा गया था कि उसके परिवार का सहयोग सीमित है।

    हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि जिन दूसरे मामलों का हवाला दिया गया, उनमें वह बरी हो चुका है और पैरोल खारिज करने का आधार केवल आशंकाएं हैं, ठोस तथ्य नहीं।

    रिकॉर्ड देखने के बाद अदालत ने पाया कि जेल में उसके व्यवहार को लेकर कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं है। अदालत ने कहा कि पैरोल अस्वीकार करने का आदेश केवल अनुमान और आशंका पर आधारित है।

    खंडपीठ ने दोहराया,

    “केवल शांति भंग होने की आशंका पैरोल से इनकार करने का आधार नहीं बन सकती।”

    अदालत ने गांव के सरपंच द्वारा जारी प्रमाणपत्र का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि याचिकाकर्ता की समाज में गहरी पकड़ है और गांव में उसकी संपत्ति भी है।

    हाईकोर्ट ने असफाक बनाम राजस्थान राज्य मामला का हवाला देते हुए कहा कि पैरोल व्यवस्था का उद्देश्य कैदियों का सुधार और समाज में पुनर्वास सुनिश्चित करना है।

    इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने पैरोल खारिज करने का आदेश रद्द किया और शर्तों के साथ 8 सप्ताह की पैरोल देने का निर्देश दिया।

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