डंकी रूट से मानव तस्करी मामले में आरोपियों को राहत नहीं, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जमानत से किया इनकार

Amir Ahmad

26 March 2026 2:55 PM IST

  • डंकी रूट से मानव तस्करी मामले में आरोपियों को राहत नहीं, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जमानत से किया इनकार

    पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने डंकी रूट के जरिए अवैध तरीके से लोगों को विदेश भेजने वाले मानव तस्करी गिरोह से जुड़े आरोपियों को नियमित जमानत देने से इनकार किया।

    अदालत ने कहा कि यह अपराध बेहद गंभीर है। इसके अंतरराष्ट्रीय प्रभाव हैं। इसलिए आरोपियों को राहत नहीं दी जा सकती।

    जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल और जस्टिस रमेश कुमारी की पीठ आरोपियों की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें विशेष जज (NIA) द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने को चुनौती दी गई थी।

    मामले में आरोप है कि आरोपी लोगों को कानूनी तरीके से विदेश भेजने का झांसा देकर मोटी रकम वसूलते थे, लेकिन बाद में उन्हें स्पेन, अल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला और मेक्सिको जैसे देशों के रास्ते अवैध रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका भेजा जाता था। इस दौरान पीड़ितों को कथित रूप से उत्पीड़न, मारपीट और वसूली का भी सामना करना पड़ता था।

    जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अपने हाथ में थी। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने 150 से अधिक लोगों को अवैध तरीके से विदेश भेजा और उनसे भारी रकम वसूली।

    अभियोजन द्वारा पेश साक्ष्यों में बैंक खातों के विस्तृत विवरण और डिजिटल प्रमाण शामिल हैं, जो आरोपियों के बीच धन के लेन-देन और यात्रा समन्वय को दर्शाते हैं।

    अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री प्रथम दृष्टया एक बड़े संगठित मानव तस्करी गिरोह के संचालन की ओर संकेत करती है, न कि यह कोई साधारण धोखाधड़ी का मामला है।

    अदालत ने कहा,

    “बैंक खाते का विवरण जो 52 पन्नों का है, भारी रकम के लेन-देन को दर्शाता है, जिससे अभियोजन का यह आरोप पुष्ट होता है कि 'एम/एस सैयेशा' के नाम पर आव्रजन का कारोबार चलाया जा रहा था।”

    पीठ ने यह भी माना कि दूसरे आरोपी की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता और यह पूरा मामला संगठित मानव तस्करी और प्रवासी तस्करी से जुड़ा है।

    अदालत ने स्पष्ट किया, “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रवासियों की तस्करी और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों को नियमित जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।”

    इसी के साथ हाईकोर्ट ने दोनों अपीलों को खारिज किया और ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि गवाहों की समयबद्ध जांच सुनिश्चित करते हुए मामले की सुनवाई में तेजी लाई जाए।

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